लीमन के खातों में घपले

Image caption लीमन ब्रदर्स के दिवालिया होने के साथ ही पूरी दुनिया वित्तीय संकट के चपेट में आ गई थी

अमरीकी निवेश बैंक लीमन ब्रदर्स के दिवालिया होने के मामले की जाँच करने वाली समिति को कंपनी के लेखा खातों में बड़े पैमाने पर हेराफेरी के सबूत मिले हैं.

समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि लीमन ब्रदर्स सितंबर 2008 में दिवालिया घोषित हुई, लेकिन असल में कई हफ़्ते पहले से ही कंपनी दिवालियापन की स्थिति में थी.

कंपनी पर एकाउंटिंग की बाज़ीगरी के ज़रिए बैलेंसशीट को वास्तविक से कहीं बेहतर स्थिति में दिखाने का आरोप लगाया गया है.

लीमन ब्रदर्स के अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने कंपनी पर कर्ज़ की मात्रा को बहुत कम करके दिखाया.

रिपोर्ट में लीमन ब्रदर्स का ऑडिट करने वाली कंपनी अर्न्स्ट एंड यंग को भी आड़े हाथों लिया गया है.

हालाँकि अपने बचाव में अर्न्स्ट एंड यंग ने कहा है कि उसने कंपनी का अंतिम ऑडिट 2007 के अंत में किया था, और उसने मान्य लेखा नियमों के अनुरूप लीमन ब्रदर्स के सेहत की सही तस्वीर पेश की थी.

उल्लेखनीय है कि लीमन ब्रदर्स का 158 वर्षों का इतिहास रहा है, और वह दिवालिया होने वाली अब तक की सबसे बडी कंपनी है.

क़ानूनी कार्रवाई का आधार

लीमन ब्रदर्स के दिवालिया होने के मामले की जाँच करने वाली समिति के प्रमुख एंटन वालुकास ने 2200 पन्नों की जाँच रिपोर्ट जारी करने के बाद शुक्रवार को कहा कि उधार देने वाली संस्थाओं के पास कंपनी के शीर्ष अधिकारियों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई करने का अच्छा-ख़ासा आधार है.

वालुकास के अनुसार ऑडिट कंपनी अर्न्स्ट एंड यंग के ख़िलाफ़ भी लापरवाही और पेशेवर गड़बड़ियों के क़ानूनी मामले लाए जा सकते हैं.

जाँच समिति ने लीमन से जुड़े सभी पक्षों के बयान लेने के बाद पाया कि कंपनी ने 'रेपो 105' नामक एकाउंटिंग बाज़ीगरी को ख़ूब इस्तेमाल किया था. इस प्रावधान के ज़रिए किसी कंपनी की परिसंपत्तियों को इस हिसाब से प्रदर्शित किया जाता है कि खाते में कर्ज़ की मात्रा वास्तविक से कहीं कम नज़र आती है.

वालुकास के अनुसार रेपो 105 के ज़रिए 2008 में लीमन ब्रदर्स के अधिकारी ये दिखा रहे थे कि कंपनी पर कर्ज़ की मात्रा घट रही है, जबकि असल में ऐसी कोई बात नहीं थी.

अमरीकी क़ानून में रेपो 105 के इस हद तक दुरुपयोग की कोई जगह नहीं है इसलिए लीमन ब्रदर्स ने इस घपले के लिए लंदन की एक कंपनी की सेवाएँ ली थी.

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