लोकसभा में वित्त विधयेक पारित

  • 29 अप्रैल 2010
वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी
Image caption प्रणव मुखर्जी का कहना था कि इस बजट से राजकोषीय घाटा कम होगा

विपक्ष के ज़ोरदार हंगामे और फिर वॉकआउट के साथ ही लोकसभा में वर्ष 2010-11 का वित्तीय विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गया है.

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने मामूली संशोधनों के साथ वित्त विधेयक पेश किया, जिसमें कॉफ़ी उत्पादकों के लिए विशेष राहत पैकेज और ऑटो, शोध, स्वास्थ्य, इस्पात, कागज़ और रियल्टी सेक्टरों के कुछ करों में छूट दी गई.

हालांकि पेट्रोलियम पदार्थों के उत्पाद शुल्क में कमी नहीं करने के अपने फ़ैसले पर वो अडिग रहे.

प्रणव मुखर्जी ने वित्त विधेयक पर अंतिम जवाब देते हुए पेट्रोल और डीज़ल पर लगाए गए उत्पाद शुल्क को वापस नहीं लेने के अपने फ़ैसले को जायज़ ठहराया, लेकिन विपक्ष इससे सहमत नहीं हुआ और लोकसभा का वॉकआउट किया.

विपक्ष की मांग थी कि पेट्रोलियम पदार्थों पर लगा उत्पाद शुल्क वापस लिया जाए.

फ़ैसला

प्रणब मुखर्जी ने पेट्रोलियम पदार्थों पर लगा उत्पाद शुल्क नहीं हटाने के अपने फ़ैसले का बचाव करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार की ताज़ा स्थिति को देखते हुए सरकार ने 'सही' क़दम उठाया है.

उनका तर्क था कि सरकार ने स्थिति को ही देखते हुए ही ख़ुदरा बाज़ार में पेट्रोलियम क़ीमतों को नहीं बढ़ाया.

प्रणब मुखर्जी का कहना था कि वित्त विधेयक का केंद्र बिंदु वित्तीय सुधार था और ये भारत की अर्थव्यवस्था के दीर्घकालिक हित में है, क्योंकि बजट में राजकोषीय घाटे को कम किया गया है.

उनका कहना था कि इससे भारत की निर्भरता दूसरे देशों पर कम होगी.

उन्होंने स्वीकार किया कि अप्रत्यक्ष कर बढ़ाने से महंगाई में इज़ाफ़ा हो रहा है, लेकिन उनका ये भी कहना था कि इसके सिवा उनके पास कोई दूसरा रास्ता नही था.

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