रिलायंस विवाद पर आज फैसला

मुकेश और अनिल अंबानी
Image caption गैस की बिक्री को लेकर दोनो भाईयों का विवाद सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा.

देश के दिग्गज कारोबारी अंबानी बंधुओ के बीच गैस की आपूर्ति को लेकर लंबे समय से चल रहे बहुचर्चित विवाद पर उच्चतम न्यायालय शुक्रवार को फैसला सुनाएगा. ज़ाहिर है आज सबकी निग़ाहें सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले पर होंगी.

कृष्णा गोदावरी बेसिन में डी 6 ब्लॉक (केडी 6 ब्लॉक) से गैस आपूर्ति को लेकर छिड़े इस विवाद में मुख्य न्यायाधीश के जी बालकृष्णन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने 26 दिन तक चली सुनवाई के बाद 18 दिसंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

इस फ़ैसले का समय इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि न्यायमूर्ति बालकृष्णन 11 मई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं.

दरअसल मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) और अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस नैचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड (आरएनआरएल) के बीच कृष्णा गोदावारी बेसिन में आरआईएल परियोजना से गैस आपूर्ति और उसकी कीमत को लेकर मामला उच्चतम न्यायालय में चल रहा है.

दोनों ही पक्षों ने बंबई उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें आरआईएल को सरकार द्वारा तय कीमत के अनुसार ही गैस आपूर्ति करने का निर्देश दिया गया है. सरकार ने दोनों पक्षों को इस बाबत नया समझौता करने के लिए कहा था.

विवाद की जड़

अंबानी परिवार में बंटवारे के समय हुए समझौते के आधार पर अनिल अंबानी की कंपनी को के जी बेसिन के डी6 क्षेत्र से गैस की आपूर्ति की जानी थी.

आरएनआरएल इस गैस क्षेत्र से होने वाले उत्पादन में से रोजाना 2.8 करोड़ घन मीटर गैस पर 2.34 डॉलर प्रति इकाई की दर से दावा कर रही है. जबकि आरआईएल का कहना है कि वह सरकार द्वारा तय की गई 4.2 डॉलर प्रति इकाई के हिसाब से ही गैस की आपूर्ति करेगी.

बंटवारे के वक़्त तय ये हुआ था कि मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज़ अनिल अंबानी की कंपनी को सत्रह साल तक रोज़ाना 2.8 करोड़ घन मीटर गैस सरकारी क़ीमत से 44 प्रतिशत कम पर मुहैया कराएगी.

आज के फ़ैसले से माना जा रहा है कि भविष्य में गैस के मूल्य निर्धारण का आधार तय हो सकेगा और साथ ही ये भी सुनिश्चित हो सकेगा कि गैस की बिक्री से करोड़ों डॉलर कमाने वाली मुकेश अंबानी की कंपनी को फ़ायदा होता है या फिर नुकसान.

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