थ्री जी स्पेक्ट्रम की नीलामी पूरी

  • 19 मई 2010
Image caption थ्री जी सेवाओं से इंटरनेट सेवाएँ और वीडियो भेजना काफ़ी आसान हो जाएगा

भारत में थ्री जी सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम की नीलामी पूरी हो गई है और सरकार को इनके लाइसेंस से लगभग 68 हज़ार करोड़ रूपए की आमदनी होगी.

ये नीलामी 34 दिन तक चली जिसमें सारे भारत के लिए 22 क्षेत्रों में थ्री जी सेवाओं के लिए मोबाइल सेवा देनेवाली कंपनियों से आवेदन माँगे गए थे.

नीलामी में कुल नौ कंपनियों ने बोली लगाई थी जिनमें से सात की बोलियाँ स्वीकार की गई हैं.

भारत सरकार ने पिछले महीने नौ अप्रैल को थ्री जी स्पेक्ट्रम की नीलामी शुरू की थी और तब उसका अनुमान था कि इससे उसे 35,000 करोड़ रूपए तक की आमदनी होगी.

लेकिन नीलामी के लिए कंपनियों के बीच जिसतरह की प्रतियोगिता हुई है उसके बाद सरकार को अनुमान से दोगुना अधिक राजस्व मिलने जा रहा है.

थ्री-जी यानी थर्ड जेनरेशन दूरसंचार क्षेत्र में अभी की नवीनतम तकनीक है जिससे सूचनाओं का प्रवाह कई गुना अधिक तेज़ हो सकता है.

थ्री जी से विशेष रूप से फ़ोन और इंटरनेट के माध्यम से वीडियो को भेजना बहुत आसान हो जाता है जिससे इंटरनेट के माध्यम से पढ़ाना, चिकित्सा करना आदि संभव हो सकता है.

नीलामी

नीलामी में किसी एक ही कंपनी को पूरे देश के सभी क्षेत्रों में सेवाएँ देने के लिए नीलामी में सफलता नहीं मिल सकी है.

अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस को सबसे अधिक 13 क्षेत्रों में सेवाएँ देने के लिए चुना गया है.

भारती टेलिकॉम को 12, आयडिया को 11, वोडाफ़ोन और टाटा को नौ-नौ क्षेत्रों में उनकी बोलियों में सफलता मिली है.

भारत के सभी 22 क्षेत्रों के लिए हर क्षेत्र में लगी अलग-अलग बोलियों को मिलाकर कुल 16,751 करोड़ रूपए की बोली लगी. यानी यदि कोई एक कंपनी सारे भारत में थ्री जी सेवाएँ देना चाहती तो उसे 16,751 करोड़ रूपए अदा करने होते.

सबसे अधिक बोली लगी दिल्ली क्षेत्र के लिए जहाँ कुल 3317 करोड़ रूपए की बोली लगी. वहाँ नीलामी जीतनेवाली तीनों कंपनियाँ - भारती, रिलायंस और वोडाफ़ोन - को ये राशि अलग-अलग देनी होगी.

दूसरे नंबर पर मुंबई रहा जहाँ कुल 3247 करोड़ रूपए की बोली लगी. वहाँ भी दिल्ली में नीलामी जीतनेवाली तीनों कंपनियाँ ही आगे रहीं.

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