एयर इंडिया प्रबंधन को कार्रवाई की छूट

एयर इंडिया के काउंटर के बाहर लोग
Image caption उड़ानें रद्द होने से यात्री विमानतल पर फँसे हुए हैं

केंद्रीय नागरिक विमानन मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने एयर इंडिया के कर्मचारियों की हड़ताल की निंदा करते हुए कहा है यह ग़ैरक़ानूनी है.

उन्होंने कहा है कि यदि एयर इंडिया प्रबंधन इस हड़ताल के ख़िलाफ़ कड़े क़दम उठाता है तो मंत्रालय को कोई आपत्ति नहीं होगी.

इस बीच एयर इंडिया प्रबंधन और हड़ताल कर रहे कर्मचारियों की यूनियन के बीच वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकला है क्योंकि बिना शर्त हड़ताल वापस लेने की प्रबंधन की पेशकश को यूनियन ने ठुकरा दिया है.

ख़बरों के मुताबिक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उडा़नें मिलाकर क़रीब 76 उड़ानें रद्द कर दी गई हैं जिसमें दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और बंगलौर की उड़ानें शामिल हैं.

उड़ानें रद्द होने से यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं और कई लोग हवाईअड्डों पर फँसे हुए हैं.

सरकारी एयरलाइन एयर इंडिया के कई कर्मचारी मंगलवार को अचानक राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर चले गए थे.

छूट

प्रफुल्ल पटेल मंत्रिमंडल की बैठक में हिस्सा लेने पहुँचे थे. पटेल ने बैठक से बाहर आकर पत्रकारों को बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी और मंत्रिमंडल के सहयोगियों को हड़ताल के बारे में जानकारी दी है.

उन्होंने कहा है कि सोमवार को एयर इंडिया ने अपने इतिहास में सबसे ज़्यादा यात्रियों के साथ उड़ान भरने का रिकॉर्ड बनाया और अगले दिन अचानक ही यूनियन ने हड़ताल पर जाने का निर्णय ले लिया.

उन्होंने हड़ताल कर रहे कर्मचारियों को याद दिलाया कि ऐसे समय में जब एयर इंडिया संकट में है और सरकार उसे संकट से उबारने की कोशिशों में लगी हुई है, ऐसे समय में कर्मचारियों ने हड़ताल करके एयर इंडिया को बड़ा आर्थिक नुक़सान पहुँचाया है.

उनका कहना था कि इस हड़ताल से एयर इंडिया की छवि को नुक़सान पहुँचा है.

उन्होंने कहा कि यह हड़ताल ग़ैर क़ानूनी है और मंत्रालय ने एयर इंडिया प्रबंधन से कहा है कि यदि वह हड़ताल कर रहे कर्मचारियों के ख़िलाफ़ कड़े क़दम उठाता है तो मंत्रालय को कोई आपत्ति नहीं होगी.

इस बीच एयर इंडिया के मुख्य महाप्रबंधक अरविंद जाधव ने कहा है कि हड़ताल कर रहे कर्मचारियों के साथ प्रबंधन की चर्चा चल रही है लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है.

उनका कहना था कि कर्मचारियों ने हड़ताल पर जाने की जो वजह बताई है, प्रबंधन ने ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया है.

वजह को लेकर विवाद

कर्मचारी यूनियन के अनुसार वे प्रबंधन के उस सर्कुलर का विरोध कर रहे हैं जिसमें यूनियन के नेताओं को अपनी मांगें सार्वजनिक नहीं करने को कहा गया था.

ये कर्मचारी ‘एयर कारपोरेशन एम्पलाईज़ यूनियन’ से जुड़े हैं. यूनियन के महासचिव जे कादयान ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "प्रबंधन ने एक गैग ऑर्डर जारी किया है जिसमें कहा गया है कि अगर यूनियन नेता मीडिया से बात करेंगे तो उनके ख़िलाफ़ क़दम उठाए जाएँगे. यूनियन के कुछ नेताओं के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक क़दम उठाए गए. ये हमारा लोकतांत्रिक हक है कि हम अपना मत रख सकें."

उनका कहना था "इसके अलावा हमारा वेतन पिछले छह महीने से डेफ़र होता आ रहा है. पता नहीं कब मिलेगा. केबिन क्रू की भी बहुत कमी है. एक और मुद्दा है ग्राउंड हैंडलिंग का. हम चाहते हैं कि एयर इंडिया ये काम ख़ुद करे न कि कोई और. मृतक कर्मचारियों से जुड़ा मुद्दा भी है. पहले मृत कर्मचारियों के बच्चों को स्थायी कर्मचारी बनाया जाता था. अब बंद कर दिया गया है. "

कर्मचारियों की यूनियन ने 31 मई को देशव्यापी हड़ताल की घोषणा कर रखी थी लेकिन इस सर्कुलर के बाद वे मंगलवार को ही हड़ताल पर चले गए.

हालांकि एयर इंडिया के मुख्य महाप्रबंधक अरविंद जाधव ने ऐसे किसी सर्कुलर से इनकार किया है.

लेकिन नागरिक विमानन मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने बताया कि कर्मचारी एक ऐसे निर्णय का विरोध कर रहे हैं जो अपरिहार्य था.

उनका कहना है कि जिस दिन मैंगलौर में विमान दुर्घटना हुई उस दिन एयर इंडिया का एक राहत विमान वहाँ भेजा गया था.

मंत्री के अनुसार उस समय वहाँ एयर इंडिया का मेंटेनेंस इंजीनियर मौजूद नहीं था इसलिए अधिकारियों की अनुमति से एक निजी कंपनी के मेंटेनेंस इंजीनियर से विमान की जाँच करवाई गई और इसी से नाराज़ कर्मचारी हड़ताल पर चले गए.

उनका कहना था, "कोई भी कंपनी या प्रबंधन अपने कर्मचारियों के बिना काम नहीं कर सकता लेकिन इस तरह बिना नोटिस दिए हड़ताल पर चले जाना ग़ैर-क़ानूनी है."

इस बीच कर्मचारियों की हड़ताल जारी है.

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