तेल के दामों में वृद्धि टली

Image caption पैट्रोल और डीज़ल के दाम बढ़ाने का फ़ैसला फ़िलहाल टल गया है

भारत सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतें बढ़ाने के फ़ैसले को स्थगित कर दिया है.

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के नेतृत्व में गठित मंत्रियों के एक दल की सोमवार को दिल्ली में बैठक हुई. इसमें पेट्रोल की क़ीमत को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने पर विचार किया गया लेकिन इस पर फिर से बातचीत करने का निर्णय करके मूल्य वृद्धि को टाल दिया गया.

सरकार को लगता है कि इससे और महंगाई बढ़ने का ख़तरा था.

इस साल फ़रवरी में अर्थशास्त्री किरीट पारिख के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया गया था जिसने पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा को अपनी रिपोर्ट पेश की थी.

इसमें सिफ़ारिश की गई थी कि पेट्रोल के दाम में छह रुपए प्रति लीटर और एलपीजी गैस के एक सिलेंडर के दाम में 100 रुपए की वृद्धि किए जाने की ज़रूरत है.

पारिख रिपोर्ट में कहा गया कि ईंधन के दामों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया जाना चाहिए क्योंकि तेल कंपनियां जिस दाम पर तेल आयात करती हैं उससे कहीं कम दाम पर उसे बेचती हैं जिससे उन्हे भारी घाटा उठाना पड़ता है.

सरकारी तेल कंपनियां इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, हिंदुस्तान पैट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम को कम दाम में ईंधन बेचने से हर रोज 203 करोड़ रुपए का घाटा उठाना पड़ रहा है.

महंगाई बढ़ने का ख़तरा

देश के पूरे यातायात क्षेत्र में सबसे ज़्यादा खपत डीज़ल की होती है. इसलिए इसके दाम बढ़ाए जाने से महंगाई बढ़ने का ख़तरा है.

इस समय मुद्रास्फीति की दर 10 प्रतिशत के क़रीब है और अगर तेल के दाम बढ़ाए जाएंगे तो उसमें और वृद्धि होगी.

इसलिए मंत्रियों के दल ने फ़ैसला किया कि इस मामले पर फिर बातचीत करने की ज़रूरत है. हालांकि अभी कोई तारीख़ तय नहीं की गई है.

बैठक से पहले योजना आयोग के उपाध्यक्ष मॉंटेक सिंह अहलुवालिया ने प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया समाचार एजेंसी को दिए इंटरव्यू में कहा था, "भारत की अंतरराष्ट्रीय साख के लिए ज़रूरी है कि तेल के दाम, दुनिया में चल रहे तेल के दामों के समान हों".

हालांकि उन्होने ये भी कहा कि ग़रीबों के लिए केरोसिन तेल पर सब्सिडी बनाए रखना ज़रूरी है.

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पेट्रोल और डीज़ल के दामों पर सरकारी नियंत्रण नहीं रहेगा तो उनमें कोई तीन रुपए प्रति लीटर की वृद्धि होगी.

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