ऋण संकट से एशिया को ख़तरा: आईएमएफ़

  • 9 जून 2010
आईएमएफ़
Image caption आईएमएफ़ की सलाह है कि नीतियाँ बनाने वाले लोग वैश्विक अर्थव्यवस्था की बड़ी तस्वीर पर नज़र रखें

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानि आईएमएफ़ ने चेतावनी दी है कि यूरोप के ऋण संकट से एशिया की अर्थव्यवस्थाओं को ख़तरा पैदा हो सकता है.

बुधवार को जारी चेतावनी में एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के बारे में जिन ख़तरों का ज़िक्र किया गया है उनमें व्यापार में कमी, तेज़ गति से पैसे का बाज़ार में आना या घटना और अर्थव्यवस्था की 'ओवरहीटिंग' यानी कुछ वर्गों की बढ़ती आमदनी से बाज़ार में माँग और महँगाई का बढ़ना शामिल हैं.

आईएमएफ़ के उप प्रबंध निदेशक नाओयुकी शिनोहारा ने सिंगापुर में कहा, "यूरोप की नकारात्मक स्थिति के कारण वैश्विक व्यापार में विघ्न पड़ सकते हैं जिससे विदेशी माँग के महत्व के कारण एशिया प्रभावित हो सकता है."

वित्तीय क्षेत्र की बात करते हुए उन्होंने कहा कि यूरोप में पैसे की उपलब्धता की गंभीर समस्या से अन्य अर्थव्यवस्थाएँ प्रभावित हो सकती हैं.

शिनोहारा का कहना था, "अहम ये होगा कि नीतियाँ बनाने वाले लोग वैश्विक अर्थव्यवस्था की बड़ी तस्वीर पर ध्यान रखें और जैसे-जैसे से बदलती है वैसे-वैसे जल्द क़दम उठाएँ. एशिया की आर्थिक स्थिति मज़बूत होने के कारण यहाँ पर जो फ़ैसले किए जाते हैं, उनका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा."

उन्होंने आगाह किया कि ऐशिया की बेहतर आर्थिक स्थिति और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में कम ब्याज दर के कारण ख़ासा पूँजी निवेश हो सकता है लेकिन यदि समय रहते उचित नीतिगत क़दम नहीं उठाए जाते तो अर्थव्यवस्था 'ओवरहीट' हो सकती है.

'ओवरहीटिंग' अर्थव्यवस्था की वो स्थिति है जब अर्थव्यवस्था अचानक किसी वर्ग के पास ख़ासा पैसा आ जाने के कारण अर्थव्यवस्था बहुत तेज़ी से बढ़ती है और माँग बढ़ने के कारण महँगई भी बढ़ जाती है.

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