पीएफ़ और पेंशन निकालने पर कर नहीं

  • 16 जून 2010

भारत सरकार ने प्रत्यक्ष कर संहिता (डायरेक्ट टैक्स कोड) का संशोधित प्रारूप जारी किया है जिसमें भविष्य निधि और पेंशन फंड निकालने पर कर लगाने के विवादित प्रस्ताव को हटा लिया गया है.

केंद्र सरकार अप्रैल, 2011 से नई व्यवस्था को लागू करने की योजना बना रही है.

ग़ौरतलब है कि प्रत्यक्ष कर संहिता के पिछले साल अगस्त में जारी प्रारूप में भविष्य निधि निकालने पर कर लगाने का प्रस्ताव किया गया था.

लेकिन संशोधित प्रारूप में सरकारी भविष्य निधि (जीपीएफ़), लोक भविष्य निधि (पीपीएफ़) और मान्यता प्राप्त भविष्य निधि (आरपीएफ़) निकालने पर आयकर से छूट का प्रस्ताव किया गया है.

प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) के संशोधित प्रारूप में घर के ऋण की ब्याज अदायगी पर कर छूट जारी रखने का प्रस्ताव किया गया है.

इसके अलावा कंपनियों की परिसंपत्तियों के आधार पर न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) लगाने के प्रस्ताव में बदलाव किया गया है.

प्रारूप जारी

उल्लेखनीय है कि प्रत्यक्ष कर संहिता का संशोधित प्रारूप सार्वजनिक चर्चा के लिए जारी किया गया है. इस पर इस महीने के अंत तक अपनी प्रतिक्रिया भेजने को कहा गया है.

उसके बाद इसे विधेयक का रूप देकर संसद के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा.

प्रस्तावित विधेयक 50 वर्ष पुराने आयकर अधिनियम का स्थान लेगा.

राजस्व सचिव सुनील मित्रा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि संसदीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ये विधेयक क़ानून बन जाएगा और इसे एक अप्रैल, 2011 से लागू कर दिया जाएगा.

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन एसएसएन मूर्ति ने स्पष्ट किया कि मसौदे में दी गई कर की दरें सिर्फ़ सुझाव है. उनका कहना था कि इसका फ़ैसला सांसदों को करना है.

संशोधित मसौदे के अनुसार किसी भी कर्मचारी की आय से भविष्य निधि और नई पेंशन योजना में दी जाने वाली रकम को एक सीमा तक उसकी आय में शामिल नहीं किया जाएगा.

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