कोई नौकरी नहीं जाएगी: प्रफुल्ल पटेल

  • 25 जुलाई 2010
प्रफ़ुल्ल पटेल
Image caption प्रफ़ुल्ल पटेल ने एयर इंडिया को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है

भारी घाटे और हड़ताल से परेशान एयर इंडिया के सुचारु संचालन के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एक योजना की घोषणा की है.

एयर इंडिया के बोर्ड अधिकारियों और कर्मचारी यूनियनों के साथ बैठक करने के बाद नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने इस योजना के बारे में संवाददाता सम्मेलन में जानकारी दी.

उन्होंने कहा कि एयर इंडिया के लोगों से उनकी बात हुई है और उन्होंने सभी को हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया है.

इस योजना की अवधि 2010 से लेकर 2014 तक की है. इसके तहत नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयर इंडिया में नौकरियों में कटौती नहीं करने और आर्थिक मदद देने का भरोसा दिलाया है. पटेल ने कहा कि एयर इंडिया में सुधार के लिए हर संभव क़दम उठाए जाएंगे.

आर्थिक मदद

उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले साल एयर इंडिया को 800 करोड़ रुपए की मदद दी थी और इस साल 1200 करोड़ रूपए और दिए जाएंगे.

उन्होंने कहा, "पहली तिमाही में कंपनी का कारोबारी प्रदर्शन अच्छा रहा, यात्रियों की संख्या और माल भाड़े में वृद्धि हुई. लेकिन ईंधन की बढ़ती क़ीमतों और बेड़े में अधिक संख्या में यात्री विमानों को शामिल किए जाने की वजह से आर्थिक मोर्चे पर दिक्कतें पेश आईं."

इस योजना में एयर इंडिया को विश्व में भारत का एम्बैसेडर बनाने की बात कही गई है. साथ ही, साल 2015 तक यात्रियों की संख्या ढाई करोड़ पर लाने का लक्ष्य रखा गया है. योजना में विमानों को समय पर उड़ने पर ज़ोर दिया गया है.

इस मौक़े पर प्रफुल्ल ने कहा कि नवी मुंबई के एयरपोर्ट की जगह नहीं बदली जाएगी. उन्होंने इस बारे में मीडिया में आ रही ख़बरों का खंडन किया.

प्रफुल्ल पटेल ने कहा, "कुछ हलकों से ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि हमें नवी मुंबई हवाईअड़डे के लिए नई जगह देखनी चाहिए. ये सिर्फ़ कह देना कि आप यहाँ से वहाँ जगह देख लीजिए, ये इतना आसान नहीं है. ग्रेटर मुंबई के आसपास तीन से चार हज़ार एकड़ का इलाका देखना इतना आसान नहीं है. दूसरी बात ये कि हवाईअड्डे के आसपास मूलभूत सुविधाएं भी होनी चाहिए. जो जगह हमने चुनी है वो आखिरी जगह है जिसे भारत सरकार की भी अनुमति मिल चुकी है. इसलिए जगह बदलने का तो कोई सवाल ही नहीं है. पर्यावरण मंत्रालय को इसे जल्द ही निपटा लेना चाहिए, नहीं तो मुंबई औऱ महाराष्ट्र दोनो का ही नुकसान होगा."

उन्होंने कहा, "अगर नवी मुंबई का मामला जल्द नहीं सुलझाया जाता है, आने वाले समय में सांताक्रूज़ हवाईअड्ड़ा औऱ बोझ नहीं उठा पाएगा. चार पाँच घंटों को छोड़कर हवाई अड्डे पर अधिकतम तौर पर व्यस्तता रहती है. अगर हवाई अड्ड़ा औऱ ज़्यादा ट्रैफिक का भार नहीं सह पाता है, तो जो अगला कदम हमें लेना पड़ेगा वो ये होगा कि हवाईअड्डे से कोई नई उड़ान का आना औऱ जाना संभव नहीं हो पाएगा."

नवी मुंबई में हवाई अड्डा बनाए जाने के मसले पर प्रफुल्ल पटेल और पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश के बीच नोंक झोंक होती रही है. प्रफ़ुल्ल पटेल कहते रहे हैं कि पर्यावरण मंत्रालय इस हवाई अड्डे पर अपनी मंज़ूरी देने में देरी कर रहा है जबकि जयराम रमेश इस बात से इनकार करते हैं.

पर्यावरणविदों का मानना है कि नवी मुंबई पर हवाई अड्डे के निर्माण से पास की दो नदियों की दिशा बदलनी पड़ेगी और आस-पास के इलाक़े में मैंग्रोव नष्ट हो जाएंगे.

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