गेहूँ की क़ीमतों में भारी उछाल

गेहूँ की खेती (फ़ाइल फ़ोटो)

अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में गेहूँ की क़ीमतों में भारी उछाल आया है. ये बढ़ोत्तरी रूस में भारी गर्मी और सूखे की वजह से फसल को हुए नुक़सान की वजह से हुई है.

रूस की गेहूँ की फसल का एक बड़ा हिस्सा बारिश की कमी और उसके बाद जंगलों में लगी आग की वजह से नष्ट हो गया है.

रूस गेहूँ का दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश है और ऐसा आशंका जताई जा रही है कि वो इस साल अपने निर्यात में भारी कटौती करेगा.

रूस के खाद्यान्न संघ का कहना है कि पिछले वर्ष रूस ने 21.4 मिलियन टन गेहूँ का निर्यात किया था और इस साल ये घट कर 15 मिलियन टन हो सकता है.

इसके कारण जुलाई में विश्व बाज़ार में गेहूँ के दामों में लगभग 50 फ़ीसदी का उछाल आया है.

पिछले 30 वर्षों की ये सबसे बडी़ बढ़ोत्तरी है.

माना जा रहा है कि इसका फायदा अमरीका, अर्जेंटीना और ऑस्ट्रेलिया जैसे गेहूँ के बड़े निर्यातक देशों को होगा. कनाडा और यूरोपीय देशों में गेहूँ की बहुत अच्छी पैदावार नहीं हुई है.

माना जा रहा है कि इसका असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ सकता है.

भारत में खाद्य पदार्थों में महँगाई राजनीतिक मुद्दा बन गई है और इसके कारण सरकार परेशानी में घिरी हुई है.

उल्लेखनीय है कि भारत में गेहूँ और चावल आम परिवारों के भोजन का मुख्य आधार है.

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