भारत: 'मध्यमवर्ग 18 वर्ष में 20 करोड़ बढ़ा'

  • 19 अगस्त 2010
एडीबी
Image caption एडीबी के अनुसार मध्यम वर्ग को फ़ायदा पहुँचाने वाली नीतियों से ग़रीबी उन्मूलन ज़्यादा कारगर ढंग से होता है

एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने अपनी एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा है कि भारत में वर्ष 1990 से 2008 के बीच मध्यम वर्गीय लोगों की संख्या 20.5 करोड़ वृद्धि हुई.

चीन में मध्यम वर्ग की जनसंख्या में वृद्धि के बाद दूसरा नंबर पर भारत में हुई वृद्धि है.

अपने वार्षिक प्रकाशन में एक अध्याय 'की इंडीकेटर्स फ़ॉर एशिया एंड द पेसिफ़िक 2010' में एडीबी ने ये जानकारी दी है. एडीबी की मध्यम वर्गीय व्यक्ति कि परिभाषा है वह व्यक्ति जो प्रतिदिन दो डॉलर से लेकर 20 डॉलर का उपभोग करता है.

एडीबी के अनुसार मध्यम वर्ग की जनसंख्या में वृद्धि के कारण 25.6 करोड़ डॉलर का वार्षिक ख़र्च देखा गया है.

इस अध्याय में ये भी बताया गया है कि मध्यम वर्ग के बढ़ने से रोज़गार के नए अवसर पैदा हुए हैं और मूलभूत ढांचे और सेवाओं के लिए जनता की ओर से शोर भी बढ़ा है.

लेकिन महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इस संस्था की रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि इस बढ़ते मध्यम वर्ग का 75 प्रतिशत मात्र दो से चार डॉलर प्रति दिन ख़र्च करता है.

इसीलिए आर्थिक संकट जैसी स्थितियों में इन लोगों के दोबारा ग़रीबी में धंस जाने का ख़तरा बना रहता है.

ग़ौरतलब है कि एडीबी के मख्य अर्थशास्त्री जौंग वा ली के अनुसार, "जिन नीतियों से मुध्यम वर्ग को फ़ायदा होता है उनसे केवल आर्थिक विकास ही नहीं होता. मध्यम वर्ग को लाभ पहुँचाने वाली नीतियों से ग़रीबी उन्मूलन ज़्यादा कारगर ढंग से होता है. केवल ग़रीबों से ही संबंधित कार्यक्रमों से भी बेहतर ढंग से."

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