वेदांता को दी गई अनुमति रद्द

  • 24 अगस्त 2010
जयराम रमेश
Image caption जयराम रमेश ने कहा है कि क़ानूनी आधार पर निर्णय लिया गया है

वेदांता रिसोर्सेस को एक बड़ा झटका देते हुए केंद्र सरकार ने मंगलवार को उड़ीसा में बॉक्साइट खनन के लिए दी गई पर्यावरणीय अनुमति को रद्द कर दिया है.

कुल 1.7 अरब डॉलर की इस परियोजना पर केंद्र सरकार की ओर से गठित समिति की रिपोर्ट के आधार पर यह फ़ैसला किया है.

अनुमति रद्द करने की घोषणा करते हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा, "इस परियोजना के लिए पर्यावरणीय संरक्षण क़ानून, वन सुरक्षा अधिनियम और वन अधिकार क़ानून का गंभीर उल्लंघन हुआ है."

उन्होंने कहा, "इस निर्णय के पीछे कोई राजनीति, कोई पूर्वाग्रह या कोई भावुकता नहीं है. मैंने यह निर्णय पूरी तरह क़ानूनी दृष्टिकोण के साथ लिया है."

इससे पहले सोमवार को ही उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने प्रदेश में लगने वाली दो परियोजनाओं के बारे में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश से मुलाक़ात की थी.

पटनायक के मुताबिक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि पॉस्को के लिए ज़रूरी सरकारी मंज़ूरी की कार्रवाई में वो तेज़ी लाने की कोशिश करेंगे.

हालांकि वेदांता की परियोजना के लिए वो ऐसा कोई आश्वासन नहीं ले पाए थे.

केंद्र सरकार के इस फ़ैसले के बाद शाम को वेदांता ने एक बयान जारी किया है. वेदांता का कहना है कि उन्होंने लांजीगढ़ अल्युमिना रिफाइनरी में किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया है. बयान में कहा गया है कि नियमगिरी खान उनके पास नहीं है और न ही बिना अनुमति के वो कोई खनन गतिविधि चलाने की मंशा रखते हैं.

वेदांता का कहना है कि वर्ष 2008 में सुप्रीम कोर्ट ने वेदांता की परियोजना की गहरी छानबीन के बाद इसे आगे बढ़ाने की अनुमति दी थी और इसके बाद उन्होंने परियोजना में अरबों डॉलर का निवेश किया है.

विरोध

स्थानीय लोग वेदांता की परियोजना का काफ़ी समय से विरोध कर रहे हैं.

हालांकि इस परियोजना को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सहमति दे दी थी लेकिन केंद्र की ओर से गठित एनसी सक्सेना कमेटी की रिपोर्ट में इसका विरोध किया गया था.

भूअधिग्रहण में वन क्षेत्रों में रह रहे आदिवासी और अन्य लोगों के अधिकारों का उल्लंघन करने के आरोपों की जांच करने के लिए बनाई गई इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उड़ीसा सरकार ने संयंत्र के लिए भू अधिग्रहण से पहले ग्राम सभा की मंज़ूरी लेने की आवश्यक औपचारिकता पूरी नहीं की.

वेदांता रिसोर्सेस को उड़ीसा की नियामगिरि पहाड़ियों में बॉक्साइट की खुदाई के लिए पहले पर्यावरणीय स्वीकृति दे दी गई थी.

लेकिन जांच की रिपोर्ट के अनुसार वेदांता की खदान के आने से लगभग 70 लाख वर्ग किलोमीटर में फैले जंगल बर्बाद हो जाएंगे.

रिपोर्ट के अनुसार इस तबाही से स्थानीय डोंगरिया कोंध जनजाति का अस्तित्व ख़तरे में पड़ जाएगा.

डोंगरिया कोंध आदिवासियों का कहना है कि नियामगिरि पहाड़ियों को वो पवित्र मानते हैं और ये उनकी रोज़ी-रोटी का भी साधन है.

वहीं कंपनी का कहना है कि उसकी गतिविधियों से पर्यावरण को कोई ख़तरा नहीं है.

वेदांता की योजना इस इलाके में बॉक्साइट की खुदाई करके वहीं बनी एक रिफ़ाइनरी में उससे ऐल्यूमीनियम बनाने की है और उसका कहना है कि उससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मज़बूती मिलेगी.

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