आयकर में छूट की सीमा बढ़ेगी

प्रणब मुखर्जी
Image caption प्रणब मुखर्जी ने बजट पेश करने के दौरान ही कहा था कि वो डाइरेक्ट टैक्स कोड लागू करने की कोशिश करेंगे.

केंद्रीय कैबिनेट ने गुरुवार को नए डाइरेक्ट टैक्स कोड यानि डीटीसी के मसौदो को मंज़ूरी दे दी है.कैबिनेट की मंज़ूरी के साथ ही भारत में प्रत्यक्ष करों के क्षेत्र में 50 साल पुराने आयकर क़ानून में बदलाव का रास्ता साफ़ हो गया है.

प्रत्यक्ष करों में लाए गए इन परिवर्तनों का मक़सद कर प्रणाली को सरल बनाना है ताकि आम आदमी कर की बारिकियों को समझ सके और साथ ही कर का बोझ भी कम हो.

आशा है कि डीटीसी विधेयक को इसी मानसून सत्र के दौरान सदन में रखा जाएगा.

नए कोड में आयकर में छूट की सीमा एक लाख 60 हज़ार से बढ़ाकर दो लाख करने का प्रावधान है.

सूत्रों के अनुसार जो नए स्लैब आएंगे उसके तहत दो से पाँच लाख तक पर दस प्रतिशत, पाँच से दस लाख पर बीस प्रतिशत और दस लाख से ऊपर 30 प्रतिशत टैक्स लग सकता है.

इस बिल के तहत कॉरपोरेट टैक्स पर लगने वाले सरचार्ज और अन्य करों को हटाया जाएगा जिससे व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को लाभ होगा.

नए मसौदे के तहत सरकारी भविष्य निधि कोष (जीपीएफ़) सार्वजनिक भविष्य निधि( पीपीएफ़) और मान्यता प्राप्त भविष्य निधि(आरपीएफ़) में निवेश करते समय, उसके संचालन के समय और निकासी के समय तीनों स्तरों पर कर छूट का प्रावधान बरक़रार रखा गया है, जबकि पहले प्रारुप में विकासी के समय आयकर लगाने का प्रावधान किया गया था.

इस बारे में वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा, ‘‘लक्ष्य ये है कि टैक्स पर दी जा रही अलग अलग छूट को कम किया जाए. टैक्स के तीन स्लैब हों. ऐसी स्थिति हो कि हर साल टैक्स को न बदलना पड़े.’’

डीटीसी विधेयक के मसौदे को कैबिनेट के सामने मंज़ूरी के लिए लाने से पहले वित्त मंत्रालय ने आम लोगों की राय जानने के लिए इसका प्रारुप जारी किया था.

इसके कुछ प्रावधानों को लेकर नौकरी पेशा लोगों ने और उद्दोग जगत ने अपनी असहमति जताई थी. बाद में उनमें कुछ फेरबदल करते हुए वित्त मंत्रालय ने संशोधित मसौदा पेश किया.

सूत्रों के अनुसार डाइरेक्ट टैक्स कोड संबंधी बिल सोमवार को संसद में पेश किया जा सकता है.

वित्त मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि विधेयक अगले वर्ष 2011 से प्रभावी होगा.

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