येन पर लगाम लगाने के उपाय

मसाकी शिराकावा
Image caption बैंक ऑफ़ जापान के गवर्नर ने येन की बढ़ती क़ीमत को कम करने के उपायों की घोषणा की

बैंक ऑफ़ जापान ने येन की बढ़ती क़ीमत से निपटने के लिए उधार को बढ़ावा देने के उपायों की घोषणा की है.

जापान के केंद्रीय बैंक ने एक आपात बैठक के बाद कहा कि वह व्यापारिक बैंकों के लिए उधार की मात्रा बढ़ाकर 100 खरब येन कर देगा.

ये उपाय इसलिए किए जा रहे हैं जिससे जापान की मुद्रा येन की क़ीमत को घटाया जा सके और व्यापारों को अधिक उधार उपलब्ध हो.

इस बीच जापान की सरकार ने भी देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए 920 अरब येन के पैकेज की घोषणा की है.

प्रधानमंत्री नाओतो कान ने कहा कि येन की बढ़ती क़ीमत पर रोक लगाने के लिए और अमरीका और यूरोप जैसी अर्थव्यवस्थाओं में चल रही कमज़ोरी से निपटने के लिए मंत्रीगण एक योजना पर सहमत हुए हैं.

येन की बढ़ती क़ीमत

विश्लेषकों को डर है कि येन की बढ़ती क़ीमत देश की अर्थव्यवस्था की बहाली को ख़तरे में डाल सकती है.

जब येन महंगा होता है तो विदेशी बाज़ार में जापान के उत्पाद भी महंगे हो जाते हैं. यही नहीं विदेशों से मिले मुनाफ़े को जब जापान लाया जाता है तो वो भी कम हो जाता है.

पिछले सप्ताह अमरीकी डॉलर के मुक़ाबले येन की क़ीमत पिछले डेढ़ साल में सबसे अधिक हो गई थी जो जापान की अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर समस्या है क्योंकि वह काफ़ी हद तक निर्यात पर निर्भर है.

हाल में हुए एक सरकारी सर्वेक्षण से संकेत मिले थे कि बहुत सी जापानी कम्पनियां अपने उत्पादन संयंत्र विदेशों में ले जाने पर विचार कर रही हैं.

बैंक ऑफ़ जापान को आशा

बैंक ऑफ़ जापान ने अपने वक्तव्य में कहा कि बैंको को कम सूद पर उधार देने की इस योजना से 300 अरब येन उधार के लिए उपलब्ध होंगे.

बैंक को आशा है कि उधार की मात्रा बढ़ाने से बाज़ार में सूद की दरें घटेंगी जिससे येन की क़ीमत पर भी लगाम लगेगी.

उसे विश्वास है कि यह योजना और सरकार के प्रयास जापान की आर्थिक बहाली को सुनिश्चित करने में प्रभावी होंगे.

लेकिन प्रेक्षकों को संदेह है कि इन नवीनतम उपायों का कोई असर होगा क्योंकि जापान अपस्फीति से जूझ रहा है.

जापान का आर्थिक विकास बहुत ढीला चल रहा है. इस साल की दूसरी तिमाही में केवल 0.4 प्रतिशत की सालाना दर विकास हुआ.

अभी तक शेयर बाज़ार पर बैंक ऑफ़ जापान की पहल का कोई असर दिखाई नहीं दिया है. जापान का निके शेयर सूचकांक 1.8 प्रतिशत चढ़कर बंद हुआ.

हाल के आंकड़े दिखाते हैं कि जल्दी ही चीन जापान को पीछे छोड़ देगा और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा.

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