मंदी पर मुद्राकोष ने दी चेतावनी

  • 11 सितंबर 2010
संयंत्र
Image caption विकासशील देशों को निर्यात की जगह अपना बाज़ार विकसित करने की सलाह दी गई है

अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ़) ने चेतावनी दी है कि वैश्विक आर्थिक मंदी से उबरने की प्रक्रिया एक बार फिर पटरी से उतर सकती है.

मुद्राकोष ने कहा है कि इस वर्ष के पहले छह महीने में आर्थिक विकास बहुत मज़बूत रहा है लेकिन साल के शेष हिस्से में और अगले साल के पहले छह महीने में फिर से मंदी का अस्थाई रुख़ दिख सकता है.

मुद्राकोष का कहना है कि चूंकि सरकारें भारी कर्ज़ से जूझ रही हैं और वित्तीय क्षेत्र कमज़ोर बना हुआ है इसलिए वैश्विक आर्थिक मंदी से उबरने की प्रक्रिया को ख़तरा है.

जी-20 देशों के वित्त उपमंत्रियों की बैठक के दौरान विवरित किए गए मुद्राकोष के नोट्स में कहा गया है कि हालांकि विकास की दर कमज़ोर रहेगी लेकिन उन्हें बजट घाटा कम करने के लिए विश्वसनीय योजना बनानी चाहिए.

सलाह

मुद्राकोष ने विकास की दर धीमी होने के ख़तरे के लिए जिन बातों की ओर ध्यान दिलाया है, उनमें अमरीका का प्रॉपर्टी बाज़ार भी शामिल है.

यहीं से आर्थिक मंदी की शुरुआत हुई थी और मुद्राकोष का कहना है कि अपने मकानों को दोबारा पाने की प्रक्रिया जारी रही तो बाज़ार में फिर कर्ज़ की समस्या खड़ी हो सकती है.

अपने नोट्स में मुद्राकोष में कहा है कि कई देशों का अपना कर्ज़ बाज़ार ख़तरों का सामना कर सकता है. इसका उदाहरण देते हुए कहा गया है कि विश्वास की कमी की वजह से ग्रीस का बाज़ार जिस तरह से डूब गया और उसे 100 अरब डॉलर का कर्ज़ लेने की ज़रुरत पड़ गई.

संस्था ने सरकारों को दिए गए सुझावों में कहा है कि वे अपनी अर्थव्यवस्था और नए उभरते बाज़ारों, जिसमें एशिया भी शामिल है, के बीच एक संतुलन क़ायम करें. इसके लिए वे निर्यात पर ज़्यादा ज़ोर देने की बजाय अपने बाज़ारों में मांग बढ़ाने जैसे उपायों पर ध्यान दें.

इन्हीं सुझावों के तहत बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को निर्यात पर ध्यान देने के साथ ही अपने बजट घाटे को कम करने की सलाह दी गई है.

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