घाटी में अशांति से व्यापारी परेशान

जम्मू में बंद कारोबार
Image caption घाटी में चल रही गड़बड़ी से जम्मू की अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ा है

कश्मीर घाटी में जून महीने से चल रही अशांति का प्रभाव जम्मू क्षेत्र के व्यापारियों पर पड़ रहा है.

ख़राब स्थिति के कारण जम्मू क्षेत्र और कश्मीर क्षेत्र के बीच व्यापार घट कर 25 प्रतिशत रह गया है. कई व्यापारियों की पहले भेजी गई आपूर्ति का भुगतान अभी तक नहीं हुआ है.

कश्मीर घाटी में लगभग हर आवश्यक वस्तु या तो जम्मू का व्यापारी भेजता है या फिर इसकी आपूर्ति जम्मू के रास्ते होती है. ऐसे में स्पष्ट है कि घाटी में चल रहे हिंसक प्रदर्शनों, हड़तालों और हिंसा का प्रतिकूल प्रभाव शांत जम्मू क्षेत्र के व्यापारियों पर भी पड़ रहा है.

जम्मू में चैंबर ऑफ़ कामर्स ऐंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष वाई आर शर्मा कहते हैं, "कश्मीर घाटी में चल रही गड़बड़ी से जम्मू की अर्थव्यवस्था और व्यापार पर काफ़ी विपरीत प्रभाव पड़ा है क्योंकि वहाँ की हर आवश्यक वस्तु की आपूर्ति जम्मू से ही होती है."

शर्मा ने बताया, "जम्मू और कश्मीर के बीच प्रतिदिन औसतन 30 करोड़ रुपए का कारोबार होता है. और यह व्यापार न होने से जम्मू के व्यापारियों को काफ़ी नुक़सान हुआ है. कई व्यापारियों ने जो पहले से सामान भेजा है उसका पैसा आना बाकी है. इस वजह से जम्मू के व्यापारियों को बहुत मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है."

बड़ी गिरावट

Image caption कश्मीर घाटी में पेट्रोल औए डीज़ल की बिक्री में भी कमी आई है.

शाम लाल जम्मू में व्यापारी हैं जो पिछले 50 वर्ष से कश्मीर घाटी में ज़रूरी चीजों की आपूर्ति कर रहे हैं.

उनका मानना है, "कश्मीर में मौजूदा हालात में जब वहाँ पिछले तीन महीने से बंद और हड़ताल है, ऐसा लगता है मानो हमारी रीढ़ की हड्डी टूट चुकी है. हमें पैसे की बहुत कमी हो रही है. कश्मीरी व्यापारी को तो नुक़सान है ही पर हमें भी बहुत भुगतना पड़ रहा है."

एक अन्य व्यापारी नरेश गुप्ता बताते हैं, "श्रीनगर में हड़ताल की वजह से जम्मू वाले नुक़सान में जा रहे हैं. हमारा 2500 से 3000 करोड़ रूपया वहां फंसा हुआ है. भगवान न करे अगर कल कोई गड़बड़ होती है तो इतने पैसे का भुगतान कौन करेगा. सरकार इस तरफ ध्यान नहीं दे रही और हम जम्मू वालों का सब्र का बाँध अब टूटने वाला है."

व्यापारियों का कहना है कि कश्मीर घाटी में पेट्रोल और डीज़ल की बिक्री में भी कमी आई है. इस पर पेट्रोल टैंकर एसोसिएशन के प्रमुख आनन शर्मा का कहना है, "कश्मीर घाटी में जितने भी पम्प हैं उनमें बिक्री 75 प्रतिशत कम हो गई है. इसलिए बिक्री कम होने से सप्लाई में कमी आई है जिससे हमारा काम कम हो गया है."

तोड़फोड़ और हिंसा

उनका कहना था, "इसके अलावा हमारी गाड़ियाँ तोड़ी गईं, 255 टैंकर तोड़े गए, पम्प तोड़े गए, ड्राईवरों को पीटा गया. हमें 200 करोड़ रूपए से अधिक का नुक़सान हुआ है."

पेट्रोल टैंकर एसोसिएशन ने कई बार घाटी में आपूर्ति करना बंद कर दिया था परंतु सरकार के सुरक्षा के आश्वासन पर दोबारा काम शुरू कर दिया.

दर्शन सिंह पिछले 40 वर्ष से घाटी में सप्लाई का ट्रक ले जाते हैं, परंतु अब उनका कहना है, "यही हालात रही तो वहाँ गाड़ी ले जा पाना बहुत मुश्किल होगा. यह डर रहता है कि हम मर जाएंगे. पत्थर आगे से आए तो क्या पता किस जगह लगेगा. मेरी गाड़ी पर भी पत्थर मारा जिससे शीशा टूट गया था. अगर वो मुझे लग जाता तो मैं बच नहीं सकता था."

लेकिन इस नुक़सान के बावजूद व्यापारियों का कहना है कि जब तक संभव होगा वो कश्मीरी लोगों को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करते रहेंगे.

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