तेज़ आर्थिक विकास, लेकिन राह में ख़तरे

एशियाई विकास बैंक, एडीबी ने भारत की आर्थिक विकास दर को पूर्व के अनुमानों से तेज़ बताया है. लेकिन एडीबी ने महंगाई और मज़बूत होते रुपए को लेकर भी चेतावनी जारी की है.

एडीबी के ताज़ा आंकड़ो के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था मार्च 2011 में समाप्त वर्ष में 8.5 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी. उल्लेखनीय है कि एडीबी ने अप्रैल में इस अवधि में विकास दर 8.2 प्रतिशत रहने की भविष्यवाणी की थी.

विकास दर के अनुमानों को बेहतर बनाने में भारत में निवेश, औद्योगिक उत्पादन और माँग में तेज़ी की सम्मिलित भूमिका बताई गई है.

लेकिन एशियन डेवलपमेंट आउटलुक 2010 अपडेट नामक अपनी रिपोर्ट में एडीबी ने मुद्रास्फीति को भी पूर्व के अनुमानों से काफ़ी ज़्यादा रहने की आशंका व्यक्त की है.

एडीबी के अनुसार मार्च 2011 में समाप्त वित्तीय वर्ष में भारत में मुद्रास्फीति 7.5 प्रतिशत रहेगी. अप्रैल में प्रकाशित इससे पहले की रिपोर्ट में ये आंकड़ा 5 प्रतिशत का था.

एडीबी का कहना है कि खाद्य पदार्थों की महंगाई एक बड़ी समस्या बनी रहेगी.

चुनौतियाँ

भारत के आर्थिक नीति निर्माताओं के लिए एक और बड़ी समस्या रुपए की मज़बूती को बताया गया है क्योंकि रिज़र्व बैंक अर्थव्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट से बचाने के लिए किए गए विशेष मौद्रिक उपायों को वापस लेने की प्रक्रिया को जारी रखने वाला है.

अगस्त 2009 से अगस्त 2010 के बीच डॉलर के मुक़ाबले रुपये में 11 प्रतिशत से ज़्यादा की मज़बूती आई है. जबकि ख़ुद रिज़र्व बैंक का अनुमान है कि मार्च को समाप्त साल के लिए औसत मुद्रास्फीति 6 प्रतिशत के आसपास रहेगी.

एडीबी के अनुसार ऊँची मुद्रास्फीति और मज़बूत होते रुपये का नकारात्मक असर अंतत: भारत के निर्यात पर पड़ सकता है.

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