यूरोपीय देशों की चीन को सलाह

युआन
Image caption विकसित देश युआन की कीमत को मंदी से न ऊबर पाने की वजह बताते हैं

चीनी मुद्रा युआन को लेकर चीन और अमरीका में जारी तनाव के बीच यूरोपीय देशों ने भी चीन से कहा है कि वह अपनी मुद्रा का मूल्य बढ़ाए.

यूरोपीय देशों ने यह सलाह चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ को दी जो एशिया और यूरोप के देशों की एक बैठक में शामिल होने के लिए ब्रसेल्स में हैं.

यूरोपीय देश और अमरीका आरोप लगाते रहे हैं कि चीन जानबूझकर युआन की क़ीमत दूसरे देशों की मुद्रा के मुक़ाबले कम रखता है.

इस वजह से अंतररराष्ट्रीय बाजा़र में चीनी माल की क़ीमत दूसरे देशों में बनी चीज़ों से सस्ती होती है.

लेकिन ब्रसेल्स में हुई बैठक के बाद 'युरोग्रुप' के अध्यक्ष ज़्यॉं कलॉड जंकर ने कहा कि चीन की ओर से किसी भी सकारात्मक क़दम के संकेत नहीं मिले हैं.

“हम अपने चीनी मित्रों को फिर से यह समझाने की कोशिश कर रहे है कि उनसे हमारी क्या उम्मीदें हैं, लेकिन हमारे चीनी मित्र हमसे कहते हैं कि उनकी आशाएँ कहीं और टिकी हैं.”

अमरीकी कार्रवाई

अमरीकी संसद के निचले सदन ने एक विधेयक पारित किया है जिसके अनुसार उन देशों के माल पर टैक्स लगाया जाएगा जो अपनी मुद्रा की क़ीमत जान बूझकर कम रखते हैं.

समझा जाता है कि यह क़ानून चीन को ध्यान में रखकर लाया गया है.

चीन इन आरोपों से इंकार करता है.

उसका कहना है कि अमरीका और यूरापीय देश विश्व बाज़ार में उसके माल की बढ़ती माँग पर रोक लगाने की कोशिश में हैं.

संतुलित विकास

जून में चीन ने संकेत दिए थे कि वो अपनी मुद्रा की विनिमय दर में अधिक लचीलापन अपनाएगा.

श्री जंकर ने पत्रकारों को बताया, "हमने चीन के उस निर्णय का स्वागत किया था कि वह अपनी मुद्रा की विनिमय दर में लचीलापन बढ़ाएगा, लेकिन अभी तक इस निर्णय का क्रियान्वयन दिखाई नहीं दिया है".

हालांकि वेन जियाबाओ ने संकेत दिए हैं कि वो अपने निर्णय पर अटल हैं.

यूरोपीय संघ के अध्यक्ष ने कहा, "चीन की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए हम समझते हैं कि युआन के मूल्य की व्यवस्थित लेकिन सार्थक मूल्य वृद्धि होनी चाहिए. इससे अधिक संतुलित विकास होगा जो चीन ही नहीं बल्कि विश्व अर्थव्यवस्था के लिए लाभदायक होगा".

अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्द्धा

वित्तीय क्षेत्र के दबाव समूह इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंटरनेशनल फाइनेंस ने बीबीसी से कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के उद्देश्य से कई देश अपनी मुद्रा का सहारा ले रहे हैं.

समूह के प्रबंध निदेशक चार्ल्स डल्लारा ने सुझाव दिया है कि विश्व की मज़बूत अर्थव्यवस्था वाले देशों को साथ आकर वर्तमान मौद्रिक नीति की निगरानी करनी चाहिए.

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