पॉस्को की परियोजना पर पर्यावरण संकट

  • 19 अक्तूबर 2010

भारत सरकार की एक समिति ने दक्षिण कोरियाई कंपनी पॉस्को के इस्पात संयंत्र को दी गई पर्यावरण संबंधी अनुमति को रद्द करने की सिफ़ारिश की है.

पॉस्को की उड़ीसा के इस इस्पात संयंत्र पर 12 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना है जो भारत का अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश है.

लेकिन आलोचकों का कहना है कि ये परियोजना लौह अयस्क का भंडार 20 वर्षों में समाप्त कर देगी.

इसके पहले भारत सरकार ने वेदांता की बॉक्साइट परियोजना को मंजूरी ये कहते हुए नहीं दी थी कि इससे पर्यावरण को नुक़सान पहुँचेगा.

दरअसल पर्यावरण मंत्रालय की समिति इस बात की जाँच कर रही है कि पॉस्को भारत के पर्यावरण क़ानूनों के अनुरूप है या नहीं. साथ ही इस परियोजना की वजह से विस्थापित होने वाले लोगों पर क्या असर पड़ेगा.

समिति की सिफ़ारिश

इस समिति के चार में से तीन सदस्यों ने इस परियोजना को पर्यावरण मंजूरी रद्द करने को कहा है.

समिति का कहना है कि इसे जिस तरीके से अनुमति दी गई, उसमें खामियाँ हैं.

बीबीसी संवाददाता संजय मजूमदार का कहना है कि इस समिति की रिपोर्ट अंतिम नहीं है लेकिन ये परियोजना संबंधी निर्णय पर असर डाल सकती है.

पॉस्को का कहना है कि वो अब भी इस परियोजना के पक्ष में है.

कंपनी के प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा,''हम इस परियोजना को पूरा करना चाहते हैं. हम हालात पर निगाह रखे हुए हैं. हम पर्यावरण मंत्रालय के फ़ैसले तक कोई टिप्पणी नहीं करना चाहेंगे.''

पॉस्को ने 12 मिलियन टन उत्पादन क्षमता वाला एक इस्पात संयंत्र लगाने के लिए 22 जून, 2005 को उड़ीसा सरकार के साथ एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे.

लेकिन भारत में विदेशी पूंजी निवेश के सबसे बड़े प्रस्ताव पर पिछले पाँच वर्षों में कार्य बहुत आगे नहीं बढ़ सका है क्योंकि स्थानीय लोग इस संयंत्र का विरोध कर रहे हैं.

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