माइक्रोफ़ाइनेंस देनदारों को बैंकों का समर्थन

ग्रामीण अर्थव्यवस्था
Image caption माइक्रोफ़ाइनेंस के तहत ख़ास तौर पर ग्रामीण इलाक़ों के ग़रीब लोगों को सस्ते लोन दिए जाने का इंतज़ाम होता है.

क़रीब हफ़्ते भर की उथल-पुथल और ऊहापोह की स्थिति के बाद भारत के बैंकिंग उद्योग ने माइक्रोफ़ाइनेंस देनदारों को अपना पूरा समर्थन दे दिया है.

भारत के बड़े बैंकों ने, जिनमें स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक और सिटी बैंक शामिल हैं, फ़ैसला किया है कि वो माइक्रोफ़ाइनेंस फ़र्मों को पैसा देना जारी रखेंगे.

माइक्रोफ़ाइनेंस कंपनियों की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों को लेकर अरबों रुपए का ये उद्योग टूटने की कग़ार पर था.

माइक्रोफ़ाइनेंस कंपनियों का कहना है की बड़ी संख्या में लोग उनका कर्ज़ नहीं चुका पा रहे हैं.

ऐसे में देनदार कंपनियां कर्ज़ लेने वालों के साथ विवाद में फंस गई थीं.

आत्महत्याओं के लिए ज़िम्मेदार

लगभग चार हफ़्ते पहले अधिकारियों ने आंध्र के गाँवों में हुई कई आत्महत्याओं के लिए इन्हीं माइक्रोफ़ाइनेंस कंपनियों को ज़िम्मेदार ठहराया था.

अधिकारियों का दावा था कि इन आत्महत्याओं के लिए कंपनी की ख़राब नीतियाँ, कर्ज़ वापसी के लिए अपनाए जाने वाले कड़े हथकंडे और ऊँची ब्याज़ दर ज़िम्मेदार हैं.

देनदारों ने इन आरोपों का खंडन किया है.

माइक्रोफ़ाइनेंस वो प्रणाली है जिसके तहत छोटे और कम राशि के क़र्ज़ ख़ासकर गाँवों के इलाक़ों में उन ग़रीब लेनदारों को दिए जाते हैं जिन्हें बैंकों से पैसे लेने में दिक़्कत होती है.

माइक्रोफ़ाइनेंस उन लोगों के लिए बनाया गया है जो छोटे व्यापार करते हैं और आसान दरों पर बैंकों से छोटी रकम कर्ज़ के तौर पर लेना चाहते हैं.

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