रिज़र्व बैंक ने बढ़ाईं ब्याज़ दरें

डी सुब्बाराव

आरबीआई के गवर्नर के मुताबिक़ मुद्रास्फीती चिंता का कारण है

महंगाई दर को नियंत्रण में रखने की एक ओर कोशिश में भारतीय रिज़र्व बैंक ने वाणिज्यक बैंकों के साथ धन के अल्पकालीन लेन-देन के लिए ब्याज़ दरों में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की है.

रिज़र्व बैंक के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने मंगलवार को चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के लिए ऋण एवं मौद्रिक नीति जारी करते हुए इसकी घोषणा की.

रेपो रेट अब बढ़कर 6.25 प्रतिशत हो गया है जबकि रिवर्स रेपो रेट 5.25 प्रतिशत हो गया है.

जिस दर पर रिज़र्व बैंक वाणिज्यक बैंकों को कर्ज़ देता है उसे रेपो रेट यानि रिपर्चेज़ रेट और जिस दर बैंक अपना अतिरिक्त धन रिज़र्व बैंक के पास रखते हैं उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं.

इन बढ़ी हुई ब्याज़ दरों के बाद गृह ऋण और वाहनों के लिए कर्ज़ में बढ़ोतरी हो सकती है.

मंहगाई दर की चुनौती

हांलाकि रिज़र्व बैंक ने उच्च मुद्रास्फीती की पृष्ठभूमि में ये किया है लेकिन हमें डर है कि इस क़दम से उपभोक्ता मांग में कमी आएगी. फ़िक्की के हाल ही के दो सर्वेक्षणों से भी से यही संकेत मिले हैं

अमित मित्रा, फ़ीक्की महासचिव

मुद्रास्फीती की दर से परेशान केंद्रीय बैंक ने इस वर्ष इन दरों में छठी बार वृद्धि की है. केंद्रीय बैंक के इस क़दम के बाद बैंक अपनी ब्याज़ दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं.

रिज़र्व बैंक के गवर्नर डी सुब्बाराव ने कहा है कि मुद्रास्फीती और ख़ासकर खाद्य पदार्थों की मंहगाई दर उनकी प्राथमिकता है. रिज़र्व बैंक ने अच्छे मॉनसून के बावजूद खाद्य पदार्थों की क़ीमतों में बढ़ोतरी पर अपनी चिंता ज़ाहिर की है.

16 अक्तूबर को समाप्त हुए सप्ताह में खाद्य पदार्थों की मंहगाई दर 13 प्रतिशत से भी ऊपर रही है.

मुद्रास्फीती ट्रेंड के विपरीत ऊंची रही है. खाद्य पदार्थों की मंहगाई दर में भी मॉनसून के बाद कमी नहीं आई है. लगातार नीतिगत कार्रवाईयों और आपूर्ति में कमियों के कम होने के बाद महंगाई दर कम हो सकती है.

डी. सुब्बाराव, भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर

डी सुब्बाराव ने कहा, "मुद्रास्फीती ट्रेंड के विपरीत ऊंची रही है. खाद्य पदार्थों की मंहगाई दर में भी मॉनसून के बाद कमी नहीं आई है. लगातार नीतिगत कार्रवाईयों और आपूर्ति में कमियों के कम होने के बाद महंगाई दर कम हो सकती है. "

होम लोन क्षेत्र में भी बैंक ने कुछ कड़े क़दम उठाए हैं. रिज़र्व बैंक ने कहा है कि अब बैंक घर की क़ीमत की 80 प्रतिशत तक की राशि ही बतौर ऋण दे सकते हैं.

औद्योगिक संस्था फ़िक्की ने रिज़र्व बैंक मौद्रिक नीति में ब्याज़ दरों में बढ़ोतरी पर चिंता व्यक्त की है.

फ़िक्की के महासचिव अमित मित्रा ने एक बयान में कहा, “हांलाकि रिज़र्व बैंक ने उच्च मुद्रास्फीती की पृष्ठभूमि ये किया है लेकिन हमें डर है कि इस क़दम से उपभोक्ता मांग में कमी आएगी. फ़िक्की के हाल ही के दो सर्वेक्षणों से भी से यही संकेत मिले हैं.”

रिज़र्व बैंक ने जिन ब्याज़ दरों का मंगलवार को ऐलान किया है वे तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं.

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