फिर रुला रहा है प्याज़

प्याज़ और इसका बढ़ता दाम इनदिनों एक बार फिर लोगों को रुला रहा है. राजधानी दिल्ली में प्याज़ 80 रुपए किलो तक बिक रहा है.

देश के अन्य हिस्सों में भी प्याज़ के दाम बढ़ने की ख़बरें हैं. दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने इस मुद्दे पर आपात बैठक बुलाई है.

सोमवार को बुलाई आपात बैठक में केंद्र सरकार फ़िलहाल प्याज़ का निर्यात बंद करने का फ़ैसला कर चुकी है. सरकार 15 जनवरी तक निर्यात परमिट जारी नहीं करेगी.

महाराष्ट्र और राजस्थान में मॉनसून में भारी बारिश के कारण प्याज़ की पैदावार पर बुरा असर पड़ा है

प्याज़ भारतीय खाने का अहम हिस्सा है और इसकी बढ़ती-घटती कीमतों का केवल आर्थिक ही नहीं राजनीतिक असर भी पड़ता है.

निर्यात पर रोक

1998 में प्याज़ के बढ़े दामों ने दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी की सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया था.

प्याज़ निर्यात की प्रक्रिया न्यूनतम निर्यात मूल्य के ज़रिए नियंत्रित होती है. ये मूल्य नाफ़ेड दूसरी कंपनियों के साथ मिलकर तय करता है. प्याज़ के निर्यात के लिए निर्यातकों को नाफ़ेड से प्रमाण पत्र चाहिए होता है.

सरकार ने राष्ट्रीय कृषि सहकारिता वितरण फ़ेडरेशन यानी नाफ़ेड से कहा है कि वो निर्यातकों को प्याज़ निर्यात करने की मंज़ूरी न दे.

न्यूनतम निर्यात मूल्य 525 डॉलर प्रति टन से बढ़ाकर 1200 डॉलर प्रति टन यानी करीब 54 हज़ार रुपए प्रति कर दिया गया है ताकि ऐसे लोगों के लिए भी प्याज़ निर्यात करना मुश्किल हो जाए जिन्हें पहले ही प्याज़ देश से बाहर बेचने का पत्र मिल चुका है.

संबंधित समाचार