धांधली के आरोप में बैंककर्मी गिरफ़्तार

सिटी बैंक

सिटी बैंक में कथित रुप से करोड़ों रुपए का घोटाला करने वाले सिटी बैंक के कर्माचारी को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है.

ख़बरें हैं कि 32 वर्षीय शिवराज पुरी ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया है.

इसके बाद पुलिस ने उन्हें अदालत में पेश किया है जहाँ उन्हें सात दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है.

बैंक के अधिकारियों ने यह स्वीकार किया है कि बैंक में एक बड़ी राशि का धांधली हुई है. लेकिन शिवराज पुरी अपने आपको निर्दोष बता रहे हैं.

राजधानी दिल्ली से सटे गुड़गाँव की सिटी बैंक शाखा में इस धांधली के बारे में इसी महीने की शुरुआत में पता चला था.

बैंक ने अभी तक यह जानकारी नहीं दी है कि वास्तव में शिवराज पुरी ने कुछ और लोगों के साथ मिलकर कुल कितने रुपए का घोटाला किया है.

धांधली

बैंक के अधिकारियों का कहना है कि शिवराज पुरी ने कुछ निवेशकर्ताओं को एक फ़र्ज़ी निवेश योजना के ज़रिए भारी भरकम राशि निवेश करने के लिए प्रेरित किया.

इस राशि को उन्होंने अपने और तीन रिश्तेदारों के नाम से खोले गए संयुक्त खाते में जमा करवा लिया.

फिर इस राशि को उन्होंने कथित तौर पर शेयर बाज़ार सहित अन्य स्थानों पर निवेश कर दिया.

बताया गया है कि उन्होंने निवेशकों को, जिनमें से ज़्यादातर प्रवासी भारतीय हैं, अधिक ब्याज़ सहित कई अन्य लाभ मिलने का प्रलोभन दिया था.

पुलिस के सामने आत्मसमर्पण के बाद शिवराज पुरी ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया से कहा, "मैंने पुलिस को सारी जानकारियाँ दे दी हैं. मेरा न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और सच सामने आ जाएगा."

अधिकारियों का कहना है कि इस धांधली का पता तब चला जब बैंक के एक ग्राहक ने एक वरिष्ठ प्रबंधक से इस योजना का ज़िक्र किया.

इसके बाद बैंक ने जाँच की और धांधली का पता चलने के बाद पुलिस में इसकी रिपोर्ट दर्ज करवाई गई.

पुलिस में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार अक्तूबर, 2009 के बाद से बैंक खाते से पैसे निकाले गए.

बैंक के अधिकारियों ने कहा है कि इससे बैंक के शेष खातेदारों पर कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा.

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