महंगाई की शेयर बाज़ार पर मार

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में गिरावट का दौर जारी है. सोमवार को 468 अंक गिरने के बाद आज इसमें करीब 27 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और ये 19196 अंकों पर बंद हुआ.

निफ़्टी में भी करीब 9 अंको की गिरावट देखी गई और ये 5754 अंकों पर बंद हुआ.

इस गिरावट के कारणों में महंगाई और तेल के ऊंचे दाम बताए जा रहे हैं.

स्टॉक मार्केट विश्लेषक कह रहे हैं कि बजट पेश होने तक बाज़ार में अस्थिरता दौर जारी रह सकता है, हालांकि बाज़ार बंद होने के बाद मंगलवार को लोगों ने थोड़ी राहत की सांस तो ज़रूर ली क्योंकि इसमें सोमवार की तरह गिरावट नहीं आई.

बाज़ार विश्लेषक आलोक चूड़ीवाला कहते हैं, ''मंगलवार एशियाई बाज़ार थोड़ा संभले और चढ़कर खुले, सोमवार को भी एशियाई बाज़ार इतने खराब नहीं थे. इसलिए भारतीय बाज़ारों को थोड़ा भरोसा मिला और सुबह वो थोड़ा संभले. चूँकि पिछले छह दिनों से भारतीय बाज़ार गिर ही रहे थे इसलिए उनमें एक रिलीफ़ रैली आनी स्वाभाविक थी. ट्रेडिंग के दूसरे भाग में विदेशी संस्थागत निवशकों की बिकवाली से बाज़ार फिर थोड़ा लुढ़के.''

विश्लेषकों के मुताबिक बाज़ार में चिंताएँ ज़्यादा और आशाएँ कम हैं. सबसे बड़ी चिंता महंगाई को लेकर है. एक तरफ़ जहाँ खाद्य महंगाई दर 18.3 प्रतिशत तक पहुँच गई है, बाज़ार में ऐसी आशंकाएँ हैं कि इस वजह से रिज़र्व बैंक ब्याज़ की दरों में बढ़ोत्तरी कर सकता है.

बजट पेश होने में ज़्यादा दिन नहीं है, और बाज़ार में इस बात को लेकर भी बहस है कि क्या सरकार बड़े सुधारवादी कदम या बिग टिकट रिफ़ार्म्स जैसे बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश के स्तर को बढ़ाना या फिर गुड्स और सर्विस टैक्स का कार्यान्वयन जैसे कदम उठाएगी.

स्टॉक मार्केट पर अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की लगातार बढ़ती कीमत का भी ज़बरदस्त दबाव है.

रिपोर्टों में कहा गया था कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए सरकार ने डीज़ल की कीमतों को नहीं बढ़ाया.

आलोक चूड़ीवाला के मुताबिक आने वाले दिनों में कंपनियाँ अपने तिमाही के नतीजे घोषित करने वाली हैं और उससे उनकी स्थिति का आंकलन किया जाएगा.

लेकिन जब तक महंगाई काबू में नहीं आती या फिर सरकार और विपक्ष के बीच तकरार की वजह से कामकाज में रुकावट ख़त्म नहीं होती, तब तक बाज़ार में अनिश्चितता बनी रहेगी.

संबंधित समाचार