औद्योगिक विकास दर गिरी, सरकार चिंतित

प्रणब मुखर्जी
Image caption प्रणब मुखर्जी महंगाई की बढ़ती दर को लेकर पहले से ही चिंतित हैं

भारत में औद्योगिक विकास की दर नवंबर, 2010 में गिरकर सिर्फ़ 2.7 प्रतिशत रह गई जबकि एक साल पहले इसी समय औद्योगिक विकास की दर 11.3 प्रतिशत थी.

ये आंकड़े ऐसे समय में आए हैं जब खाद्य सामग्री की महंगाई दर 18.32 प्रतिशत तक जा पहुँची है और सामान्य महंगाई की दर भी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.

वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने इस पर चिंता ज़ाहिर करते हुए कहा है कि औद्योगिक विकास दर में आई कमी और महंगाई की बढ़ती दर का अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है.

जबकि इसके विपरीत योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा है कि वे औद्योगिक विकास की घटी हुई दर से चिंतित नहीं है और आश्वस्त हैं कि भारत वित्तीय वर्ष के अंत में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विकास का 8.5 प्रतिशत का लक्ष्य हासिल कर लेगा.

क़दम उठाएँगे -प्रणब

औद्योगिक विकास की दर में आई भारी गिरावट पर चिंता ज़ाहिर करते हुए वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि इसका अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है और सरकार औद्योगिक विकास की दर बढ़ाने के लिए समुचित क़दम उठाएगी.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार प्रणब मुखर्जी ने कहा, "यदि औद्योगिक विकास की दर नीचे जाती है और महंगाई बढ़ती है तो इसका विपरीत प्रभाव पड़ेगा लेकिन मैं समय से पहले किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँचना चाहता."

उन्होंने कहा, "हमें इसे देखना होगा और ऐसे सुधारात्मक क़दम उठाने होंगे जिससे कि बचे चार महीनों में औद्योगिक विकास की दर वापस ऊपर पहुंच सके."

हालांकि यह कहा जा रहा है कि औद्योगिक विकास के दर में आई इस गिरावट की यह वजह यह हो सकती है कि पिछले साल नवंबर में 11.3 प्रतिशत के विकास दर का आधार बिंदु था लेकिन वित्तमंत्री ने कहा है कि इसके आधार पर संतोष नहीं करना चाहते.

जहाँ तक महंगाई का सवाल है कि तो माना जा रहा है कि नवंबर के 7.48 प्रतिशत की तुलना में दिसंबर में महंगाई की दर में बढ़ोत्तरी ही दर्ज की जाएगी क्योंकि इस दौरान खाद्य पदार्थों की महंगाई की दर 18.32 प्रतिशत तक जा पहुँची है.

'जीडीपी विकास लक्ष्य पा लेंगे'

लेकिन वित्तमंत्री के विपरीत योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने विश्वास जताया है कि औद्योगिक विकास दर में आई गिरावट के बावजूद वित्तीय वर्ष के अंत में सकल घरेलू उत्पाद विकास (जीडीपी) की दर 8.5 प्रतिशत रहेगी.

उन्होंने पत्रकारों से कहा, "मैं नवंबर में आई गिरावट को लेकर चिंतित नहीं हूँ. यह हर महीने बदलता रहता है. जहाँ तक जीडीपी का सवाल है तो मैं हम सही रास्ते पर हैं."

मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा, "कुल मिलाकर (अप्रैल से नवंबर तक) औद्योगिक विकास की दर 9.5 प्रतिशत है और इसे अगर जीडीपी के अनुसार देखें तो यह ठीक दिखाई देता है."

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि वित्तीय वर्ष 2010-11 के अंत में औद्योगिक विकास की दर 10 प्रतिशत रहेगी और जीडीपी 8.5 या इससे कुछ अधिक रहेगी."

औद्योगिक विकास दर में गिरावट

औद्योगिक विकास की दर नवंबर, 2010 में गिरकर 2.7 प्रतिशत रह गई है, जबकि एक साल पहले इसी समय के लिए औद्योगिक विकास की दर 11.3 प्रतिशत थी.

Image caption औद्योगिक विकास की दर में अगस्त से गिरावट आ रही है

निर्माण क्षेत्र या मैन्युफ़ैक्चरिंग सेक्टर में आई गिरावट की वजह से औद्योगिक विकास की दर में यह कमी आई है.

हालांकि बुधवार को जारी किए गए आँकड़ों के अनुसार अक्तूबर, 2010 में औद्योगिक उत्पादन की दर 11.29 प्रतिशत थी.

इन आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से नवंबर के बीच औद्योगिक विकास की दर 9.5 प्रतिशत थी जबकि एक साल पहले इसी काल के लिए औद्योगिक विकास दर 7.4 प्रतिशत थी.

औद्योगिक विकास की दर जुलाई में बढ़कर 15 प्रतिशत तक पहुँच गई थी लेकिन अगस्त में गिरकर यह 6.9 प्रतिशत रह गई और अगस्त में और गिरकर 4.4 प्रतिशत ही रह गई.

लेकिन नंबवर में यह दर गिरकर 2.3 प्रतिशत रह गई जबकि एक साल पहले नंवबर में औद्योगिक विकास की दर 12.3 प्रतिशत रिकॉर्ड की गई थी.

निर्माण क्षेत्र के अलावा खनन क्षेत्र में भी गिरावट दर की गई है और नवंबर, 2010 में विकास दर 6.0 दर्ज की गई है जबकि एक साल पहले विकास दर 10.7 प्रतिशत थी.

जानकारों का कहना है कि चूंकि औद्योगिक विकास दर में भारी गिरावट दिखाई दे रही है, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया अब इस असमंजस में होगी कि बढ़ती महंगाई पर क़ाबू पाने के लिए अपनी तिमाही समीक्षा के दौरान ब्याज़ के दरों में बढ़ोत्तरी करे या नहीं.

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