अनिल अंबानी पर रोक

अनिल अंबानी
Image caption अनिल अंबानी दिसंबर 2011 तक शेयर बाज़ार में निवेश नहीं कर पाएंगे.

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानि सेबी ने जाने-माने उद्योगपति अनिल अंबानी को शेयर बाज़ार में कारोबार से दिसंबर 2011 तक रोक दिया है.

भारतीय बाज़ार की नियामक संस्था सेबी ने अनिल अंबानी की रियालंस इनफ़्रा और आरएनआरएल नामक कंपनियों पर भी दिसंबर 2012 तक शेयर बाज़ार में निवेश करने पर रोक लगाई है.

अनिल अंबानी की कंपनियों के साथ विवाद सुलझाने की कार्यवाही के तहत सेबी ने यह कदम उठाया है. नियामक संस्था सेबी का ये आदेश विदेशी कर्ज लेने संबंधी नियमों के कथित उल्लंघन के बाद शुरू की गई नियामक जांच के संबंध में दिया गया है.

इस फ़ैसले में अनिल अंबानी के शीर्ष अधिकारियों को 50 करोड़ रुपये का निपटारा शुल्क भी देना पड़ा है.

अनिल अंबानी के अलावा रिलायंस इनफ़्रा के उपाध्यक्ष सतीश सेठ और इसी कंपनी के तीन निदेशक - एससी गुप्ता, ललित जालान, और जेपी चलसानी भी शेयर बाज़ार में दिसंबर 2011 तक निवेश नहीं कर पाएंगे.

सिर्फ़ शेयर बाज़ार पर रोक

ये रोक सिर्फ़ शेयर बाज़ार के लिए है. सेबी ने अनिल अंबानी,उनकी कंपनियों से जुड़े अधिकारी और दोनों कंपनियां को म्युचुअल फंड में कारोबार करने और प्राइमरी इश्यू,बायबैक और खुली पेशकश करने की इजाज़त दे दी है.

रिलायंस इनफ़्रा के प्रवक्ता ने सेबी के निर्णय पर कहा है, "रिलायंस इनफ़्रा ने अपने और अपने निदेशकों के ख़िलाफ़ सेबी के जून 2010 के कारण बताओ नोटिस से संबंधित कार्रवाई अपनी मर्जी से निपटाई है. सेबी की प्रणाली के मुताबिक यह निपटारा किसी तरह की गलती माने बगैर किया गया है."

सेबी के अनुसार अनिल अंबानी समूह ने बाहरी वाणिज्यिक उधारी या विदेशी मुद्रा में परिवर्तनीय बॉन्ड के जरिये जुटाई रकम शेयर बाजारों में लगाई है. जांच के दौरान सेबी को पता चला कि इस मामले में रिलायंस इनफ़्रा और आरएनआरएल दोषी हैं.

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