'पर्यावरण नीतियों से विदेशी निवेश प्रभावित'

Image caption जानकारों का कहना है कि आरबीआई ने पर्यावरण नीतियों पर आपत्ति जताई है

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (आरबीआई) का कहना है कि पर्यावरण संवदेनशील नीतियों की वजह से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रभावित हुआ है.

रिज़र्व बैंक ने अपनी मध्यावधि समीक्षा में कहा है, ''पर्यावरण संवेदनशील नीतियाँ खनन, टाउनशिप और बंदरगाहों में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को नुक़सान पहुँचा रही है.''

जानकारों का कहना है कि आरबीआई का इशारा सीधे सीधे पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश की ओर है.

हाल में पर्यावरण मंत्रालय ने कई जानी मानी परियोजनाओं पर पर्यावरण के सवाल पर आपत्ति जताई थी.

आरबीआई का कहना है कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए ज्यादा प्रयास किए जाने की ज़रूरत है.

विदेशी निवेश गिरा

उल्लेखनीय है कि अप्रैल से नवंबर अवधि में प्रत्यक्ष विदेशी पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 25 अरब डॉलर से गिरकर 19 अरब डॉलर हो गया.

इसकी तुलना में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने अप्रैल से नवंबर की अवधि में 30 अरब डॉलर का निवेश किया जबकि पिछले साल ये राशि 20 अरब डॉलर थी.

इधर रिज़र्व बैंक ने मंहगाई को रोकने के प्रयासों के तहत एक बार फिर ब्याज़ दरें (रेपो रेट) बढ़ाई हैं.

पिछले एक वर्ष में सातवीं बार ब्याज़ दरें बढ़ाई गई हैं. ये वो ब्याज़ दर है जो रिज़र्व बैंक अन्य बैंकों को दिए गए कर्ज़ पर लगाता है.

अब रेपो रेट 6.25 प्रतिशत से बढ़कर 6.5 प्रतिशत हो गया है जो 2008 के बाद सबसे अधिक है.

भारत में मंहगाई तेज़ी से बढ़ी है और दिसंबर महीने में यह 8.43 प्रतिशत पर पहुंच गई थी. देश में खाद्य पदार्थों और तेल की क़ीमतें बहुत अधिक हो चुकी हैं.

रिज़र्व बैंक के गवर्नर डी सुब्बा राव ने बताया कि मंहगाई बहुत ऊपर जा चुकी है और इसलिए ये उपाय किए जा रहे हैं ताकि इसे कम किया जाए.

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