कच्चे तेल की क़ीमत में उछाल

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Image caption डर इस बात का भी है कि विरोध की लहर अरब जगत के तेल उत्पादक देशों तक न पहुंच जाए.

मिस्र के बिगड़ते हालात ने कच्चे तेल की क़ीमत को सौ डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा दिया है.

स्वेज़ नहर खाड़ी के देशों से यूरोप तक कच्चा तेल ले जाने वाले जहाज़ों का मुख्य रास्ता है.

पिछले दो सालों में पहली बार कच्चे तेल की कीमत इस स्तर पर पहुंची है.

लंदन में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत मुख्य अंतरराष्ट्रीय मापदंडों में से है.

मिस्र के हालात ने तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता पैदा कर दी है.

विरोध की लहर

डर इस बात का है कि कहीं हालात इतने न बिगड़ जाएं कि स्वेज़ नहर से तेल टैंकरों की आवाजाही पर असर पड़े. फ़िलहाल टैंकरों पर कोई असर नहीं दिखा है.

बीबीसी के आर्थिक मामलों के संवाददाता एंड्रू वाकर का कहना है कि एक आशंका ये भी है कि असंतोष और विरोध की ये लहर अरब जगत के तेल उत्पादक देशों तक न पहुंच जाए.

तेल की क़ीमत पहले से ही 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास घूम रही थी क्योंकि उभरती अर्थव्यवस्थाओं ख़ासकर एशियाई देशों में मांग काफ़ी बढ़ी हुई है.

इस तरह के भी आसार हैं कि अमरीकी अर्थव्यवस्था गति पकड़ रही है.

तेल की बढ़ती कीमत को कई देशों में मंहगाई का कारण भी माना जा रहा है.

वैसे यदि कीमतों में और तेज़ी आती है तो तेल उत्पादक देशों के संगठन के पास और तेल उत्पादन की भी क्षमता है.

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