खाद्य पदार्थों की क़ीमतें आसमान पर

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Image caption दुनिया भर में खाद्य पदार्थों की क़ीमतें बढ़ी हैं

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार दुनिया भर में खाद्य पदार्थों की क़ीमतें जनवरी के महीने में भी रिकार्ड स्तर पर पहुंच गई हैं जिसका सबसे अधिक नुकसान ग़रीब लोगों को हो रहा है.

संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के ताज़ा आकड़ों के अनुसार लगातार सातवें महीने बढ़ी रही हैं.

एफएओ फूड प्राइस इंडेक्स के अनुसार दिसंबर महीने की तुलना में जनवरी में खाद्य पदार्थों की क़ीमतों में 3.4 प्रतिशत की बढ़त देखी गई है.

एफएओ ने 1990 में खाद्य पदार्थों की क़ीमतों का इंडेक्स बनाना शुरु किया था जिसके बाद अब ये इंडेक्स सबसे ऊपर है.

संगठन के अर्थशास्त्री अब्दुलरज़ा अब्बासियन का कहना था, ‘‘. ’’

जनवरी महीने में मांस के अलावा सभी खाद्य पदार्थों की क़ीमतें बढ़ी हैं. सबसे ज़्यादा बढ़त डेयरी यानी दुग्ध उत्पादों में देखी गई है.

जहां डेयरी उत्पादों की क़ीमतों में दिसंबर की तुलना में 6.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी है वहीं तेल और तेल उत्पादों में 5.6 प्रतिशत की बढ़त देखी गई है.

दालों की क़ीमतों में दिसंबर की तुलना में तीन प्रतिशत की बढ़त है. दुनिया में गेहूं की आपूर्ति में कमी के कारण गेहूं की क़ीमत भी बढ़ रही है.

यूरोप में पिछले महीने मांस की क़ीमतों में कमी के कारण इंडेक्स में मांस की क़ीमतें स्थिर दिखी हैं जबकि जर्मनी में अंडों और सूअर के मांस में टॉक्सिन पाए जाने की घटना के कारण इनकी बिक्री कम हुई और क़ीमत कम रही है.

अब्बासियन का कहना था, ‘‘ खाद्य पदार्थों का बढ़ना कम आय वालों के लिए चिंता का विषय है क्योंकि ग़रीब लोगों की आमदनी का एक बड़ा हिस्सा खाद्य पदार्थों पर ही खर्च होता है.'’

अब्बासियन कहते हैं कि पूरे खाद्य इंडेक्स में खुशी की बात सिर्फ़ इतनी ही है कि कई देशों में फसल अच्छी होने के कारण विश्व भर की तुलना में स्थानीय स्तर पर कुछ खाद्य पदार्थों की क़ीमतें कम रह सकती हैं.

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