अमरीकी वाणिज्य मंत्री भारत आएँगे

  • 4 फरवरी 2011
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Image caption अमरीकी वाणिज्य मंत्री के साथ व्यापारियों का एक दल भी भारत आएगा

अंतरिक्ष, परमाणु, सुरक्षा, उड्डयन संबंधी जानकारी और रक्षा क्षेत्रों में अमरीकी निर्यात बढ़ाने के इरादे से अमरीका के वाणिज्य मंत्री गैरी लॉक पांच दिनों के दौरे पर अगले हफ्ते भारत जा रहे हैं.

उनके दौरे का मक़सद दोनों देशों के बीच संबंधों को और भी मज़बूत बनाना होगा.

राष्ट्रपति बराक ओबामा की नवंबर में भारत यात्रा के बाद अमरीकी प्रशासन के किसी वरिष्ठ मंत्री का यह पहला भारत दौरा है. उनके दौरे से पहले अमरीका ने भारत की अंतरिक्ष और रक्षा की कंपनियों पर लगी पाबंदी हटा कर दोनों देशों के बीच इन क्षेत्रों में व्यापार का रास्ता खोल दिया है.

गैरी लॉक अपनी भारत यात्रा के दौरान दिल्ली, मुंबई और बंगलौर जाएंगे.

दिल्ली में वह मंत्रियों से मिलेंगे. बंगलौर में वह भारतीय अंतरिक्ष रिसर्च संगठन (इसरो) जाएंगे.

इसके इलावा वहाँ वह इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस में छात्रों से मिलेंगे.

वाणिज्य मंत्री हिंदुस्तान एरोनाटिक्स लिमिटेड के कार्यालय भी जाएंगे जहाँ वह यह बताने की कोशिश करेंगे कि किस तरह विमान-चालन (एविएशन) के क्षेत्र में अमरीकी सहयोग से दोनों देशों में रोज़गार के अवसर पैदा हो रहे हैं.

गैरी लॉक के साथ 24 विभिन्न क्षेत्रों के व्यापारी जा रहे हैं जिन में परमाणु क्षेत्र से जुड़े लोग भी शामिल हैं.

एंटिटी लिस्ट से बाहर

भारत के 1998 के परमाणु परीक्षण के बाद अमरीका ने भारत की कई सुरक्षा कंपनियों को एंटिटी लिस्ट में शामिल कर दिया था जिसका मतलब यह हुआ कि वे अमरीका के साथ ख़ास अनुमति के बाद ही व्यापार कर सकती थीं. दूसरे शब्दों में वे अमरीका से आयात और निर्यात नहीं कर सकती थीं. लेकिन अब इस एंटिटी लिस्ट में शामिल अधिकतर भारतीय कंपनियों का नाम इस लिस्ट से खारिज कर दिया गया है. इस का वादा राष्ट्रपति ओबामा ने नवम्बर में अपने भारत दौरे में किया था. गैरी लॉक का दौरा छह फरवरी से शुरू होगा. पहले वह दिल्ली जाएंगे जहाँ वह वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा और नागरिक उड्डयन मंत्री वायलर रवि से मिलेंगे. इसके बाद वह बंगलौर जाएंगे जहाँ वह विमानों के 'एरो इंडिया शो' में आमंत्रित हैं. इस शो में अमरीका के विमानों का पविलियन सब से बड़ा होगा.

अमरीकी प्रशासन के अनुसार वाणिज्य मंत्री के दौरे का मक़सद दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते को और मज़बूत करना, ख़ास तौर से रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना है.

रोज़गार के अवसर

अमरीका को आशा है कि इस बढ़ते हुए व्यापारिक रिश्ते से अमरीका में हजारों की संख्या में नौकरियों के अवसर पैदा होंगे.

गैरी लौक ने पत्रकारों से बातें करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच फलते फूलते व्यापारिक संबंद से दोनों देशों में नौकरियों के अवसर बढ़ेंगे.

अमरीकी राष्ट्रपति ने अमरीकी निर्यात को 2015 तक दोगुना करने का वायदा किया है इसी लिए वह भारत और चीन से व्यापारिक रिश्ते को मज़बूत करने पर ज़ोर दे रहे हैं. भारत और अमरीका के बीच 2010 में सामानों का आयात निर्यात 44 अरब डालर तक पहुँच गया था. जबकि विभिन्न सेवाओं का व्यापार 38 अरब डालर का था. राष्ट्रपति बराक ओबामा का कहना है कि यह अभी शुरुआत है. आगे चल कर दोनों देशों के बीच संबंध और भी गहरे होंगे.

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