मुश्किलें बढ़ी हैं अनिल की

अनिल अंबानी
Image caption कथित रुप से घोटालों से जुड़े होने के आरोपों के कारण अनिल अंबानी की कंपनी का भविष्य खतरे में पड़ सकता है.

2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले से कथित तौर पर जुड़े होने की ख़बरों के बाद अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं.

कई लोग कंपनी के भविष्य को लेकर सवाल भी उठा रहे हैं.

उच्चतम न्यायालय की देखरेख में जाँच एजेंसी सीबीआई इस मामले की जाँच कर रही है.

घोटाले पर सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक अनिल अंबानी की रिलायंस कम्युनिकेशंस को अनुचित फ़ायदे मिले.

सीएजी के मुताबिक कंपनी को विविध तकनीक के आधार पर (सीडीएमए और जीएसएम) मोबाईल सेवा जारी रखने दिया गया और इसके लिए कैबिनेट की मंज़ूरी भी नहीं ली गई.

आरोप ये भी लग रहे हैं कि कंपनी ने एतिसालात डीबी टेलिकॉम को एक फ्रंट के तौर पर लाइसेंस पाने के लिए इस्तेमाल किया.

इसके बाद सीबीआई ने रिलायंस टेलीकम्युनिकेशंस के कुछ अफ़सरों से 2001 से 2008 के बीच के वक्त के बारे में पूछताछ की.

फिर ऐसी ख़बरें आईं कि इंस्टिट्यूट ऑफ़ चार्टर्ड एकांटेंट्स ऑफ़ इंडिया या आईसीएआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एडीएजी ग्रुप की कंपनी रिलायंस इन्फ्रा के एकाउंटिंग तरीकों पर सवाल उठाए हैं, हालांकि कंपनी ने कहा कि उसे आईसीएआई की तरफ़ से कोई सवाल नहीं पूछे गए.

इससे पहले सेबी की तरफ़ से एक कंसेंट ऑर्डर पास किया गया जिसमें एडीएडी ग्रुप की कंपनियाँ रिलायंस इन्फ्रा और आरएनआरएल को पचास करोड़ रुपए देने को कहे.

दोनो कंपनियों पर आरोप था कि उन्होंने विदेशी निवेश और व्यापारिक तरीकों की अवहेलना की और भारत से बाहर से आए पैसों को गलत तरीके से स्टॉक मार्केट में लगाया.यानि अनिल अंबानी की एडीएजी की कंपनियों के लिए एक के बाद एक बुरी ख़बरें आ रही हैं.

बाज़ार विश्लेषक आलोक चूडीवाला कहते हैं, ‘बाज़ार की मनोदशा बेहद नकारात्मक है. बाज़ार को अनिश्चितता पसंद नहीं है. ग्रुप की कंपनियों को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं. इस ग्रुप पर फ़िलहाल प्रश्नचिह्न लगा हुआ है. ऐसे माहौल में सटोरिए अफ़वाहें फ़ैलाकर सबसे ज़्यादा फ़ायदा उठाते हैं.’

उधर आर्थिक विश्लेषक आलोक पुराणिक इसे अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप के लिए असाधारण संकट का समय बताते हैं.

वो कहते हैं, ‘निवेशकों को डर है कि अगर 2-जी स्पेक्ट्रम की जाँच आगे बढ़ेगी तो ऐसा न हो कि कंपनियों के लाइसेंस वापस ले लिए जाएं. दूसरा ये डर है कि कोई ऐसा राजनीतिक गठजोड़ नहीं है जो उन्हें समर्थन देता हुआ दिखे.’

यानि एडीएजी के लिए ये मुश्किलों भरा समय तो है लेकिन विश्लेषक अभी भी कंपनियों के भविष्य को लेकर बहुत निराश नहीं लगते क्योंकि जिन सेक्टरों में कंपनियों का निवेश है, उनका भविष्य बहुत उज्जवल है. इसलिए कुछ विश्लेषक ये भी कह रहे हैं कि ऐसे वक्त जब स्टॉक के दाम कम हैं तो निवेशक बाज़ार में उतरकर ग्रुप कंपनियों के शेयर खरीद सकते हैं.

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