तेल की क़ीमतों में भारी उछाल

  • 18 फरवरी 2011
Image caption तेल का बाज़ार मध्य पूर्व को लेकर संवेनशील है

मध्य पूर्व में जन असंतोष के मद्देनज़र अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की क़ीमतें ढाई साल के सर्वोच्च स्तर पर पहुँच गई हैं.

गुरुवार को एक समय कच्चे तेल की नॉर्थ सी ब्रेंट क़िस्म प्रति बैरल 104 डॉलर की दर से बिकी.

बीबीसी संवाददाता एंड्र्यू वॉकर के अनुसार तेल के व्यापार से जुड़े लोगों को आशंका है कि बढ़ते जन असंतोष के कारण दो प्रमुख निर्यातकों लीबिया और बहरीन से आपूर्ति बाधित हो सकती है.

उल्लेखनीय पिछले दिनों इन दोनों देशों के अलावा ईरान में राजनीतिक तनाव बढ़ा है.

विश्लेषकों को लगता है कि जन असंतोष बढ़ने का असर न सिर्फ़ इन देशों में तेल उत्पादन पर पड़ सकता है, बल्कि वहाँ से होने वाला तेल का निर्यात भी प्रभावित हो सकता है.

अभी कुछ दिन पहले मिस्र में जनांदोलन का असर भी तेल की क़ीमतों पर देखा गया था. तब तेल के बाज़ार में मुख्य चिंता स्वेज़ नहर से तेल टैंकरों की आवाजाही के प्रभावित होने को लेकर थी.

पुराना इतिहास

मध्य पूर्व में राजनीतिक तनाव के चलते तेल की क़ीमतों में उछाल प्रभावित होने का पुराना इतिहास रहा है.

सबसे ज्वलंत उदाहरण 1970 के दशक के उत्तरार्द्ध में ईरानी क्रांति का है. इस इस्लामी क्रांति से ईरान की तेल उत्पादन क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई थी.

फलस्वरूप तेल की क़ीमतों में भारी उछाल आई और जिसके असर से अंतत: वैश्विक मंदी का दौर शुरू हुआ.

इन दिनों मध्य पूर्व में जारी अशांति का वैसा तो असर नहीं है, लेकिन जानकारों को स्थिति बिगड़ने की आशंका ज़रूर है.

आशंका हो भी क्यों नहीं, दुनिया के कुल तेल उत्पादन का एक तिहाई इस समय मध्य पूर्व और उत्तरी अफ़्रीका से आता है. इतना ही नहीं पूरी दुनिया के ज्ञान तेल भंडार का 60 प्रतिशत इसी इलाक़े में है.

संबंधित समाचार