उद्योग जगत की मिश्रित प्रतिक्रिया

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के बजट पर बाज़ार और अर्थशास्त्रियों से मिली जुली प्रतिक्रिया आ रही है. जहाँ कई लोगों ने शिक्षा और कृषि पर वित्त मंत्री के प्रस्तावों का स्वागत किया है, तो अन्य कई ने इसे दिशाहीन क़रार दिया है.

आलोचकों के मुताबिक़ इस बजट में किसी बड़े सुधार की कोई घोषणा नहीं की गई है और ये चुनावों को ध्यान में रखकर बनाया गया आम बजट है जिसे लोग कुछ ही दिनों में भूल भी जाएंगे.

'सुधार की कोई घोषणा नहीं'

इंडियन मर्चेंट्स चैंबर की किरण नंदा के अनुसार ऐसे वक़्त जब भारत तेज़ी से तरक्क़ी की राह पर है और उसका मुक़ाबला चीन से है, वित्त मंत्री ने एक महत्वपूर्ण मौक़ा खो दिया है.

वो कहती हैं, ''अच्छी बात ये है कि बजट ने कोई नुक़सान नहीं किया. खाद्य सुरक्षा बिल के बारे में सरकार का कहना है कि ये आएगा, लेकिन कब, ये साफ़ नहीं है. आर्थिक सुधारों के बारे में इशारे किए गए हैं कि वो होंगे, लेकिन कब, ये साफ़ नहीं है. किसी बड़े आर्थिक सुधार का बजट में कोई ज़िक्र नहीं है. उन्होंने ख़र्चों की बात की है, लेकिन इसका अभी भी कोई ज़िक्र नहीं है कि ख़र्चे कितने प्रभावशाली तरीक़े से किए गए हैं.''

कई लोग वित्त मंत्री के इन प्रस्तावों में वित्तीय घाटा 4.6 प्रतिशत के लक्ष्य पर सवाल उठा रहे हैं, ख़ासकर ऐसे वक़्त जब तेल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में ऊपर जा रहे हैं. और ये लक्ष्य ये मानकर तय किया गया है कि देश की जीडीपी में नौ प्रतिशत की तेज़ी से बढ़ोत्तरी होगी.

Image caption हीरानंदानी ग्रुप के निरंजन हीराचंदानी का मानना है कि वित्त मंत्री 4.6 प्रतिशत के वित्तीय घाटे के लक्ष्य को हासिल कर लेंगें.

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के अर्थशास्त्री डीके जोशी इसे ‘स्टेटस को’ यानि ऐसा बजट मानते हैं जहाँ वर्तमान स्थिति में ज़्यादा छेड़छाड़ नहीं की गई हो.

वो कहते हैं, ''बजट की कोशिश है कि जो विदेशी निवेश लंबे समय के लिए भारत में आता है, उसको प्रोत्साहित किया जाए. बजट ये मानकर चल रहा है कि जीडीपी में नौ प्रतिशत की दर से बढ़ोत्तरी होगी, जो मेरे ख़्याल से थोड़ा आशावादी है. बजट में गाँवों की अर्थव्यवस्था को सुधारने पर ध्यान दिया गया है. बजट में बहुत कुछ करने की कोशिश की गई है. 4.6 प्रतिशत के वित्तीय घाटे का लक्ष्य उस वक़्त पाया जा सकता है जब सब्सिडी पर लगाम लगा कर रखी जाए, जिसका वादा किया गया है.''

लेकिन हीरानंदानी ग्रुप के निरंजन हीराचंदानी को उम्मीद है कि वित्तमंत्री 4.6 प्रतिशत के वित्तीय घाटे के लक्ष्य को हासिल कर पाएंगे.

उनका कहना है, ''वित्तमंत्री ने कहा है कि वो 40 हज़ार करोड़ रुपए का और विनिवेश इस साल करेंगे. पिछले साल 3जी की नीलामी से पैसा आया था, इस साल वो कोई और संपत्ति बेच देंगे. घरों पर क़र्ज़ के बारे में घोषणाओं से बहुत फ़ायदा नहीं होने वाला. हाउसिंग क्षेत्र में सर्विस टैक्स भी जारी रहेंगे. स्टैंप ड्यूटी बढ़ गई है. एसेसमेंट टैक्स बढ़ गए हैं यानि एक तरफ़ जहाँ सरकार ने गाँव में रहने वाले लोगों का ख़्याल रखा है, शहर में रहने वाले लोगों के घरों की ज़रूरतों पर बहुत ध्यान नहीं दिया है.''

वो कहते हैं, ''स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (एसईज़ेड) पर मैट नाम का टैक्स लगाना ग़लत है. ये एक तरह से निवेशकों के साथ धोखा है क्योंकि उनसे वायदा किया गया था कि 15 साल तक ये सेक्टर टैक्स-फ़्री रहेगा. अगर उन्हें टैक्स लगाना था तो नई परियोजनाओं पर लगाना चाहिए था, न कि पुरानी. अब हिंदुस्तान में 10 हज़ार करोड़ का निवेश एसईज़ेड में हो चुका है. हमारे खुद के प्रोजेक्ट में 500 करोड़ का विदेशी निवेश आया है. वातानुकूलित अस्पतालों पर टैक्स लगाकर वित्तमंत्री पता नहीं क्या संदेश देना चाह रहे हैं. क्या ग़रीब लोगों के अस्पताल वातानुकूलित नहीं होने चाहिए?''

'बजट महत्व खो चुका है'

उधर ऑर्बिस फ़ाइनानशियल लिमिटेड के अतुल गुप्ता के मुताबिक़ बजट अब अपना महत्व खो चुका है.

उनका कहना है, ''वित्त मंत्री ने विदेशी संस्थागत निवेशकों को भारत में म्युचुअल फ़ंड के सहारे निवेश करने का रास्ता खोलने की बात कही है, लेकिन अभी भी इस बारे में कई बातें साफ़ नहीं हैं. बजट में विदेश में रह रहे भारतीय के लिहाज़ से कुछ नहीं कहा गया है. विदेशों में रह रहे भारतीयों या पीआईओ के मुक़ाबले विदेशी निवशकों के लिए भारत में निवेश करना ज़्यादा आसान है. मुझे ख़ुशी होती अगर वित्तमंत्री ने क़दम उठाए होते जिससे विदेशों में रह रहे भारतीयों को भी बराबरी का दर्जा मिल पाता.''

एसएमसी ग्लोबल सिक्योरिटीज़ के शोध विभाग के प्रमुख जगन्नाधाम थुनुगुंटला के मुताबिक़, ''जब पिछले साल सरकार ने वित्तीय घाटे को 5.5 प्रतिशत तक रखने की बात कही थी, तो वो थोड़ा अनुचित लगा था, लेकिन 3जी स्पेक्ट्रम की नीलामी से आए धन से वित्तीय घाटे 5.1 प्रतिशत ही रहा, जो कि काफ़ी अच्छा था. लेकिन वित्तीय घाटे को कम करने के लिए संपत्ति को बेचना शायद अच्छी बात नहीं हो. कॉर्परेटिव सेक्टर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि उन्हें 11,500 करोड़ का डायरेक्ट टैक्स का नुक़सान हो रहा है, लेकिन 11,200 करोड़ का इंडायरेक्ट टैक्स का फ़ायदा भी हो रहा है. एक्साईस ड्यूटी में बढ़ोत्तरी नहीं करना एक निर्भीक क़दम है. भारत में क़रीब तीन करोड़ लोग टैक्स देते हैं. वित्त मंत्री ने इस संख्या को बढ़ाने पर ध्यान दिया है.''

'सकारात्मक क़दम'

इंडिया फ़र्स्ट लाइफ़ इंश्योरेंस के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ डॉक्टर पी नंदगोपाल ने इसे सुधारों की दिशा में सकारात्मक क़दम बताया है.

उनका कहना था, ''वित्त मंत्री ने साफ़ कहा कि बीमा, पेंशन और बैंकिग के विषय में नए विधेयक संसद के इसी सत्र में पेश किए जाएंगे. ये एक स्वागत योग्य क़दम है. डायरेक्ट टैक्स कोड का एक अप्रैल, 2012 में लागू होना सकारात्मक कदम है.''

पार्श्वनाथ डेवलेपर्स लिमिटेड के चेयरमैन प्रदीप जैन ने वित्तमंत्री को रिएल इस्टेट सेक्टर की ओर ध्यान देने पर बधाई दी.

Image caption पार्श्वनाथ डेवलपर्स के चेयरमैन प्रदीप जैन के मुताबिक़ होम लोन के सुझावों से कम आमदनी वाले लोगों को घर ख़रीदने में मदद मिलेगी.

उनका कहना था, ''प्रायोरिटी होम लोन की सीमा 20 लाख रुपए से 25 लाख तक करने से निचले इनकम ग्रुप के ख़रीदारों को फ़ायदा होगा. एक प्रतिशत के इंटरेस्ट सबवेंशन यानि सरकार की ओर से 25 लाख के घर तक के लिए 15 लाख के ऋण पर एक प्रतिशत की सब्सिडी से कम क़ीमत में घर पाने में मदद मिलेगी. इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉंड्स में विदेशी निवेश की सीमा 25 अरब तक किए जाने से इस सेक्टर में फ़ंडिग की समस्या को हटाने में मदद मिलेगी.''

फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन एक्सपोर्ट के प्रमुख रामू एस देवरा के मुताबिक़ उनके कई सुझावों को वित्तमंत्री ने मान लिया है जैसे कि कच्चे सिल्क, टेक्सटाइल में काम आने वाले सामान, केमिकल सेक्टर में काम आने वाले सामान.

उधर स्टॉक ब्रोकिंग फ़र्म एंजल ब्रोकिंग ने बजट को ऑटो सेक्टर के लिए सकारात्मक बताया है क्योंकि एक्साइज़ ड्यूटी में कोई फेरबदल नहीं किया गया है.

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