आरबीआई ने फिर बढ़ाई ब्याज़ दरें

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Image caption पिछले साल मार्च के महीने से ये आठवीं बार है कि जब आरबीआई ने दरों को बढ़ाया है

भारतीय रिज़र्व बैंक ने अपनी ताज़ा आर्थिक समीक्षा में रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में 25 अंकों की बढ़ोतरी की है.

इस बदलाव के बाद रेपो रेट 6.5 से बढ़कर 6.75 हो गया है, जबकि रिवर्स रेपो रेट 5.5 प्रतिशत से बढ़कर 5.75 हो गया है.

अर्थशास्त्र की भाषा में रेपो रेट वो दर है जिस पर आरबीआई बैंकों को कम अवधि के लिए उधार देता है. बैंक जब आरबीआई में अपना पैसा जमा करते हैं और आरबीआई उन्हें जिस दर से ब्याज देता है वह रिवर्स रेपो रेट कहलाता है.

पिछले साल मार्च के महीने से ये आठवीं बार है कि जब आरबीआई ने दरों को बढ़ाया है.

पिछली बार आर्थिक नीति की समीक्षा में भी आरबीआई ने दरों में 25 अंको की बढ़ोतरी की थी. उस वक्त भी मुद्रास्फीति पर चिंता जताई गई थी और ये चिंता अब भी कायम है.

खाद्य दरों में दिसंबर में आई ऊंचाईयों के बाद गिरावट तो दर्ज की गई है, लेकिन ये अभी भी नौ प्रतिशत से ज़्यादा है.

आरबीआई का कहना है कि जहाँ अमरीका और यूरो ज़ोन में स्थिति बेहतर हो रही है, वहीं पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ़्रीका में आए संकट के कारण तेल के दामों में आई बढ़ोतरी से वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता आ गई है.

साथ ही खाद्य पदार्थों और दूसरे सामान के दामों में आए उछाल से मुद्रास्फ़ीति को लेकर चिंता उत्पन्न हो गई है.

समीक्षा में बैंक ने कहा कि उर्जा और सामान के दामों में अनिश्चितता से निवेश के माहौल पर असर पड़ेगा जिससे अर्थव्यव्यवस्था की रफ़्तार पर भी फर्क पड़ सकता है.

आईआईपी यानि औद्योगिक उत्पाद के इंडेक्स में कैपिटल गुड्स का कमज़ोर प्रदर्शन ये संकेत देता है कि निवेश की रफ़्तार धीमी हो रही है.

बैंक ने उम्मीद जताई है कि आज की घोषणा से मुद्रास्फ़ीति पर लगाम लगेगी.

उद्योग जगत चिंतित

उधर उद्योग जगत के समूह फ़िक्की के महानिदेशक डॉक्टर राजीव कुमार ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि ब्याज दरों में वृद्धि से विकास की रफ़्तार पर विपरीत असर पड़ेगा.

उनका कहना था, ”फ़िक्की के हाल में किए गए दो सर्वेक्षणों में संकेत मिले थे कि व्यापारियों के आत्मविश्वास में कमी आ रही है, जिसका असर औद्योगिक तेज़ी पर पड़ेगा. इसका कारण है पूँजी दरों में बढ़ोतरी और महत्त्वपूर्ण कच्चे माल के दामों में बढ़ोतरी.”

डॉक्टर राजीव कुमार ने सरकार को सलाह दी कि उसे आपूर्ति में आ रही दिक्कतों पर ध्यान देने की ज़रूरत है.

फ़िक्की के आर पी स्वामी ने कहा कि आज की घोषणा से आम आदमी और बाज़ार को ग़लत संदेश जा रहा है.

भारतीय उद्योग संस्था एसोचैम ने आज के क़दम को एक 'फ़ायरफ़ाईटिंग एक्सरसाईज़' बताया.

संस्था के मुताबिक इससे उत्पादन क्षेत्र को नुकसान होगा क्योंकि ये क्षेत्र वेतन और बढ़ते कच्चे माल के दामों से विकास की रफ़्तार में गिरावट का शिकार है.

एसोचैम अध्यक्ष दिलीप मोदी का कहना था कि ऐसे समय में जब मुद्रा स्फ़ीति 8.31 प्रतिशत के आसपास है और कंपनियों के मुनाफ़ों में कमी आ रही है, तो ऐसी घोषणा से नए निवेश पर असर पड़ेगा.

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