'भारतीय भी कर रहे हैं चैरिटी'

Image caption पश्चिमी देशों में चेरिटी के लिए औद्योगिक संगठनों की ओर से पैसा दिया जाना आम बात है

बिल गेट्स और वॉरेन बफेट जो काम कर रहे हैं (चेरिटी और राहत कार्य), निश्चय ही वह सराहनीय है और हमें उनका साथ देना चाहिए.

हम भी अपने स्तर पर जितना काम कर सकते हैं, हम कर रहे हैं. लेकिन अभी हमारे यहां इस तरह की जागृति उतनी नहीं है. पर अब आनी शुरु हो गई है.

हमारे यहां बिज़नेस अभी हाल ही में खुले हैं, बहुत सीमित कंपनियां हैं. कंपनियों की कैश क्षमता जितनी होती है, उसके हिसाब से चैरिटी पर ख़र्च कर रहे हैं.

भारत में भी अपनी सहूलियत के हिसाब से लोग इस दिशा में काफ़ी प्रयास कर रहे हैं.

जैसे हमने 'कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलीटी' प्रोग्राम बना रखा है. जिसके तहत तमाम तरह के सामाजिक कल्याण के कार्यों पर ख़र्च कर रहे हैं.

जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, पर्यावरण जैसे क्षेत्रों पर कंपनी की तरफ़ से काम हो रहा है. दूसरे शिक्षा जैसे क्षेत्रों पर व्यक्तिगत स्तर भी ख़ूब काम हो रहा है.

तो काम वही हो रहा है जो कि किया जा सकता है. हम ऐसा भी नहीं करते कि एक बार कोई काम कर लिया तो दोबारा नहीं करें, बल्कि जो भी काम आप करें अनवरत करें.

रही बात टैक्स सेविंग के लिए चैरिटी कार्यों की तो इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है.

लेकिन ऐसा भी नहीं है कि सिर्फ़ इसीलिए लोग चैरिटी पर ख़र्च कर रहे हैं. आप अकेले आगे नहीं बढ़ सकते हैं बल्कि सबको साथ लेकर चलना ही बेहतर होता है.

आप जो कमाते हैं उसके साथ आपकी कुछ ज़िम्मेदारियां भी होती हैं और लोग ख़ासकर कंपनियाँ और औद्योगिक घराने इन चीजों को हमारे यहां भी समझ रहे हैं.

(समीरात्मज मिश्र के साथ बातचीत पर आधारित)

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