भारतीय उद्योगपतियों को प्रोत्साहित करने की कोशिश

Image caption बिल गेट्स और वारेन बफेट ने भारतीय उद्योगपतियों को परोपकार के लिए प्रोत्साहित किया

माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स और दुनिया में सबसे बड़े निवेशकों में से एक वारेन बफेट ने क़रीब 70 भारतीय उद्योगपतियों से मुलाक़ात की और उन्हें परोपकारी कार्यों में अपनी संपत्ति का कुछ हिस्सा देने के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया.

बिल गेट्स और वारेन बफेट अपनी संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा सामाजिक सुधार के लिए दे चुके हैं और अमरीका और चीन में भी कई उद्योगपतियों को इस मक़सद के लिए तैयार कर चुके हैं.

अब बारी भारत की थी जहां उद्योगजगत में मुनाफा काफी तेज़ी से बढ़ रहा है. लेकिन भारत में 55 अरबपति होने के बावजूद चैरिटी में पैसा देने का चलन बहुत कम देखा जाता है.

भारतीय उद्योगपतियों के साथ मुलाक़ात के बाद वारेन बफेट ने बताया कि उन्हें भारतीय उद्योगपतियों में परोपकारी काम करने का उत्साह देखने को मिला. लेकिन काले धन का मुद्दा इस प्रेस वार्ता में छाया रहा.

जब बिल गेट्स से पूछा गया कि भारत में टैक्स बचाने के लिए दिए गए दान या काले धन को सही ठहराने के लिए दिए गए दान को वो परोपकारी कहेंगें या नहीं, तो उन्होंने कहा,''मैं भारत में पुलिस का रोल नहीं निभा सकता. अगर भारत में कुछ ग़लत हो रहा है, तो उसकी ज़िम्मेदारी पुलिस की है, हमारी नहीं. जब किसी देश में अमीरी बढ़ती है, तो परोपकारी काम भी बढ़ जाते हैं और हम भारत में इस मुहिम को बढ़ावा ही देंगे.''

इसी सवाल के जवाब में वारेन बफेट ने कहा कि अगर दान में दिए गए पैसे से बनाए गए टीके से एक बच्चे की जान बचती है, तो उसका स्रोत पर फिर कोई ध्यान नहीं देता.

वहीं विप्रो के चेयरमैन अज़ीम प्रेमजी का कहना था कि अगर कोई अवैध रुप से पैसा कमा रहा है, तो उसके पास ज़्यादा बड़ा कारण है पैसा दान में देने का.

अज़ीम प्रेमजी ने कहा कि भारत में तेज़ी से हो रहे विकास के बीच अमीरों और ग़रीबों के बीच बढ़ रहे फासले को कम करना एक बेहद महत्तवपूर्ण मिशन है.

उन्होंने कहा,''मेरे हिसाब से अमीरों और ग़रीबों के बीच फासले को कम करना एक बेहद महत्तवपूर्ण मिशन है. सामाजिक सुधार के लिए आज की सरकार की प्रतिबद्घता पहले के मुकाबले काफी ज़्यादा है.जो लोग इतना पैसा कमा कर कामयाबी की ऊंचाइयों तक पहुंचे है, उन्हें समाज में सुधार लाने के तरीके भी मालूम हैं. और मेरे ख्याल से परोपकारी काम करने की उत्सुक्ता युवा अरबपतियों में ज़्यादा दिखती है.''

भारत में देश और विदेश के अरबपतियों के बीच हुई ये पहली ऐसी बैठक थी जहां सामाजिक सुधार के लिए परोपकारी कार्यों की चर्चा हुई और बैठक का नतीजा काफी सकारात्मक बताया गया.

लेकिन ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि भारत में 55 में से कितने उद्योगपति परोपकारी कार्यों के लिए अपनी जेब ढीली करते हैं.

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