भारतीय रिज़र्व बैंक ने ब्याज दरें बढ़ाईं

डी सुब्बाराव
Image caption सुब्बाराव ने कहा कि मुद्रास्फीति की दर को नीचे लाना ज़रुरी है, चाहे इसकी क़ीमत थोड़े समय के लिए कम विकास दर ही क्यों ना हो.

मंहगाई दर को काबू करने की कोशिश में भारतीय रिज़र्व बैंक ने वित्त वर्ष 2011-12 की वार्षिक नीति में रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट की ब्याज दरों में आधे प्रतिशत की बढ़ोतरी की है.

रेपो रेट वो दर होती है जिसपर आरबीआई बैंको को ऋण देता है. ये दर अब 7.25 प्रतिशत हो गई है.

रिवर्स रेपो रेट वो दर है जिसपर रिज़र्व बैंक, बैंकों से उधार लेता है. रिवर्स रेपो रेट अब 6.25 प्रतिशत कर दी गई है.

भारत के केंद्रीय बैंक का कहना है कि उच्च मुद्रास्फीति विकास दर की गति को बनाए रखने में बाधक साबित हो रही है क्योंकि इसके कारण निवेश पर असर पड़ रहा है.

मुद्रास्फीति की चुनौती

आरबीआई के गवर्नर डी सुब्बाराव ने कहा,"वर्तमान में बढ़ी हुई मुद्रास्फीति की दर भविष्य में विकास दर के लिए एक बड़ा जोखिम है. इसलिए उसे नीचे लाना ज़रुरी है, चाहे इसकी क़ीमत थोड़े समय के लिए कम विकास दर ही क्यों ना हो."

डी सुब्बाराव ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, "मंहगाई दर हमारे लिए अब भी एक मुख्य आर्थिक चिंता है. पिछले साल अप्रैल से जुलाई तक खाद्य पदार्थों के चलते थोक मूल्य सूचकांक में साढ़े तीन प्रतिशत की वृद्धि हुई थी. उसके बाद अगस्त और नवंबर में गैर-खाद्य पदार्थों की वजह से थोक मूल्य सूचकांक में 1.8 प्रतिशत की कमी आई. लेकिन दिसंबर 2010 से मार्च 2011 के बीच थोक मूल्य सूचकांक में 3.4 प्रतिशत तेज़ वृद्धि हुई."

रिज़र्व बैंक ने बचत खातों में जमा राशि पर ब्याज दर में भी इजाफ़ा करने की घोषणा की है. अब बचत खातों में जमा राशि पर वर्तमान में साढ़े तीन प्रतिशत के बजाय का चार प्रतिशत का ब्याज मिलेगा.

रिज़र्व बैंक की ब्याज दरों में घोषणा के बाद बैंक भी अपनी ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं.

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