'तीन अरब एशियाई अमीरों की श्रेणी में'

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Image caption हनोई बैठक में इस मसौदे पर चर्चा हो रही है.

एशियाई विकास बैंक(एडीबी) की एक ताज़ा रिपोर्ट के मसौदे के अनुसार वर्ष 2050 तक तीन अरब अतिरिक्त एशियाई लोगों का जीवन और बेहतर हो जाएगा और वो अमीरों की श्रेणी में दाख़िल हो जाएंगे.

वियतनाम के हनोई शहर में होने वाली एडीबी की 44वीं वार्षिक बैठक में 'एशिया 2050- रियलाइज़िंग द एशियन सेंचुरी' नाम की रिपोर्ट का मसौदा पेश किया गया.

इस मसौदे के अनुसार वैश्विक अर्थव्यवस्था का केंद्र बिंदु एशिया की ओर होता जा रहा है और वर्ष 2050 तक पूरी दुनिया के उत्पाद का लगभग 50 प्रतिशत एशियाई क्षेत्र से होगा जो कि मौजूदा 27 प्रतिशत की भागीदारी के मुक़ाबले लगभग दोगुना हो जाएगा.

इसके अलावा 50 प्रतिशत वैश्विक व्यापार और निवेश भी एशियाई देशों से होगा. लेकिन ये सारी बातें तभी संभव है अगर एशियाई देशों का मौजूदा विकास दर बरक़रार रहे.

'दो परिस्थितियां'

इस मसौदे में एशियाई देशों के विकास के रास्ते में दो संभावित परिस्थितियों की तुलना की गई है.

एक अंदाज़ा ये है कि जिस तरह से एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था में बढ़ोतरी हो रही है, 21वीं सदी एशियाई शताब्दी हो. अगर ऐसा होता है तो 2050 तक एशियाई देशों का सकल घरेलू उत्पाद 148 खरब डॉलर हो जाएगा जो पूरी दुनिया के उत्पाद का 51 प्रतिशत होगा.

इसके अलावा एशियाई देशों के लोगों की प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 38 हज़ार 600 डॉलर हो जाएगी जबकि 2050 में दुनिया भर में लोगों की प्रति व्यक्ति आय 36 हज़ार 600 डॉलर होगी.

एक दूसरी परिस्थिति के अनुसार अगले पांच से 10 सालों में प्रमुख एशियाई देश जैसे चीन, भारत, इंडोनेशिया और वियतनाम की अर्थव्यवस्था के विकास दर में कमी आएगी और लोगों की आमदनी में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी.

इस परिस्थिति को मिडिल इनकम ट्रैप कहा जाता है और आशंका है कि एशियाई देश इसके शिकार हो सकते हैं.

इस स्थिति में वर्ष 2050 तक एशियाई देशों का उत्पाद कुल वैश्विक उत्पाद का केवल 32 प्रतिशत होगा और एशियाई लोगों की प्रति व्यक्ति आय केवल 20 हज़ार 300 डॉलर होगी.

एडीबी के अध्यक्ष हारूहिको कुरोडा ने कहा कि दोनों परिस्थितियों के नतीजों में बहुत बड़ा अंतर है ख़ासकर आम लोगों पर इसका प्रभाव बहुत अधिक होगा.

विकासशील एशियाई देशों ने ग़रीबी दूर करने के मामले में काफ़ी प्रगति की है लेकिन अभी भी कई समस्याएं बाक़ी है.

उदाहरण के तौर पर एशिया की आधी आबादी को मामूली साफ़-सफ़ाई की सुविधा नहीं हासिल है और इस क्षेत्र में नौ अरब लोगों को बिजली की सुविधा नहीं है.

इस मसौदे में इस बात का भी ज़िक्र किया गया है कि 2050 तक विकास के लक्ष्य को हासिल करने के रास्ते में एशियाई देशों के सामने क्या-क्या चुनौतियाँ होंगी और इन देशों के नेताओं को क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर सामरिक महत्व के क्या-क्या अहम फ़ैसले लेने होंगें.

हनोई में चल रही बैठक के दौरान इस मसौदे पर गंभीर विचार-विमर्श हो रहे हैं और इसी साल अगस्त में इन बहसों पर आधारित एक किताब प्रकाशित की जाएगी.

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