एसबीआई के मुनाफ़े में रिकॉर्ड कमी

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Image caption एसबीआई भारत में सबसे अधिक ऋण देने वाला बैंक है.

भारत के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की मार्च में ख़त्म हुई वित्त वर्ष 2010-11 की चौथी तिमाही में मुनाफ़े में रिकॉर्ड कमी दर्ज की गई है.

पिछले कारोबारी साल यानि 2009-10 की इसी तिमाही में 1,867 करोड़ का लाभ दर्ज करने वाले बैंक को मार्च में समाप्त हुई तिमाही में सिर्फ़ 20.8 करोड़ रुपए का लाभ हुआ.

ये बैंक के मुनाफ़े में 99 प्रतिशत की कमी है. तिमाही कमाई के मामले में बैंक का ये नतीजा पिछले एक दशक का सबसे ख़राब था.

असाधारण प्रावधान

मुनाफ़े में कमी की सबसे बड़ी वजह ये है कि ग्राहकों के पास फंसे ऋण आदि के लिए बैंक को 4,160 करोड़ का प्रावधान करना पड़ा है. बैंक ने रिज़र्व बैंक के निर्देश के अनुसार टीज़र होम लोन के लिए भी एक बड़ी रकम प्रावधान किया है.

इन असाधारण प्रावधानों के कारण बैंक के मुनाफ़े पर आघात हुआ है. लेकिन बैंक नए चेयरमैन प्रतीप चौधुरी इससे अधिक चिंतित नहीं हैं.

इसी बर्ष सात अप्रैल को ओपी भट्ट से एसबीआई की कमान संभालने वाले प्रतीप चौधुरी ने तिमाही नतीजों के बाद कहा, "ये 'एक बार किए जाने वाले' प्रावधान हैं. आने वाली तिमाहियों में इन्हें दोहराया नहीं जाएगा."

लेकिन लाभ में कमी के बावजूद बैंक ने अपने शेयरधारकों को 30 रुपए प्रति शेयर डिविडेंड देने का घोषणा की है.

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