भारत को वित्तीय मदद पर सवाल

  • 15 जून 2011
भारत
Image caption भारत में तेज़ी से आर्थिक विकास हुआ है

ब्रिटेन की एक संसदीय समिति ने यह सिफ़ारिश की है कि ब्रिटेन को कम से कम वर्ष 2015 तक भारत को वित्तीय सहायता देनी चाहिए.

ब्रिटेन का अंतरराष्ट्रीय विकास विभाग अगले चार वर्षों में भारत के तीन सबसे ग़रीब राज्यों में एक अरब पाउंड से ज़्यादा की राशि ख़र्च करने वाला है. लेकिन आलोचक सरकार के इस फ़ैसले पर सवाल भी उठा रहे हैं.

आलोचकों का कहना है कि ख़र्चों में कटौती से जूझ रहे ब्रिटेन को एक ऐसे देश में सहायता राशि देने की क्या आवश्यकता है, जो हाल ही में विश्व बैंक के मध्य आय ग्रुप वाले देशों में शामिल हो गया है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिन कुछ देशों में तेज़ी से आर्थिक विकास हो रहा है, उनमें भारत भी शामिल है. भारत का विकास दर आठ प्रतिशत से भी ज़्यादा है. जबकि इस साल ब्रिटेन का विकास दर 1.5 प्रतिशत ही रहने का अनुमान है.

सवाल

भारत के पास अपना अंतरिक्ष कार्यक्रम है, तो विदेशों में सहायता के लिए भी कार्यक्रम है.

इस स्थिति में ब्रिटेन में कुछ लोग ये सवाल उठा रहे हैं कि उनका देश भारत को हर साल 28 करोड़ पाउंड की सहायता राशि क्यों दे रहा है?

लेकिन भारत को वित्तीय सहायता देने की सिफ़ारिश करने वाली संसदीय समिति का जवाब सीधा है.

समिति का तर्क है कि ब्रिटेन के आर्थिक संकट की तुलना भारत में दिखने वाली ग़रीबी से नहीं की जा सकती, जहाँ 80 करोड़ लोग प्रतिदिन दो डॉलर से भी कम राशि पर अपनी जीविका चलाते हैं.

केंद्रित सहायता

हालाँकि संसदीय समिति की रिपोर्ट ये ज़रूर कहती है कि ब्रिटेन की ओर से दी जाने वाली वित्तीय सहायता और केंद्रित होनी चाहिए. ब्रिटेन को साफ़-सफ़ाई जैसे क्षेत्रों पर ध्यान देना चाहिए.

Image caption बिहार जैसे ग़रीब राज्यों में सहायता की सिफ़ारिश की गई है

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि ब्रिटेन को भारत के तीन ग़रीब राज्यों बिहार, मध्य प्रदेश और उड़ीसा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.

ब्रिटेन भारत को जो वित्तीय सहायता देता है, वर्ष 2015 में उसकी समीक्षा की जाएगी. संयुक्त राष्ट्र ने भी इस साल तक सहस्राब्दि विकास लक्ष्य हासिल करने की प्रतिबद्धता जताई है.

इन लक्ष्यों में पहला है ग़रीबी और भूखमरी को ख़त्म करना. संयुक्त राष्ट्र का भी ये कहना है कि भारत में अच्छी प्रगति के बिना इस लक्ष्य को हासिल करना असंभव होगा.

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