'विकास के लिए राजस्व नीति कड़ी हो'

Image caption ओईसीडी की रिपोर्ट में भारत में मंदी आने की चेतावनी दी गई है

आर्थिक सहयोग और विकास संगठन ओईसीडी की आर्थिक रिपोर्ट का कहना है कि भारत को मुद्रास्फीति नियंत्रित करने और सतत विकास के लिए आर्थिक और राजस्व नीति को कड़ा करना चाहिए.

ओईसीडी के चौंतीस औद्योगिक देशों ने चेतावनी दी है कि भारत के बढ़ते तेल सब्सिडी बिल की वजह से सरकार का राजस्व घाटा बढ़ सकता है.

भारतीय रिज़र्व बैंक ने 2010 के मार्च महीने से धीरे धीरे करके 250 बेसिक अंकों से सूद की दरें बढ़ाई हैं लेकिन मुद्रास्फीति पर क़ाबू नहीं पाया जा सका है.

मई के महीने में मुद्रास्फीति 9.06 प्रतिशत जा पहुंची जबकि एक महीने पहले वो 8.66 प्रतिशत थी.

चेतावनी

ओईसीडी की रिपोर्ट का कहना है कि मुद्रास्फीति के बढ़ने से एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था धीमी पड़ती जा रही है, क़र्ज़ की दरें बढ़ रही हैं और उपभोक्ता की मांग घट रही है.

जनवरी से मार्च के बीच पिछले पांच तिमाहों की अपेक्षा अर्थव्यवस्था सबसे कम गति से बढ़ी है.

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Image caption तेल की वजह से राजस्व घाटे में बढ़ोत्तरी की चेतावनी भी दी गई है

आर्थिक विश्लेषकों ने सरकार की ढीली ढाली राजस्व नीति को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया है.

भारत सरकार इस वित्तीय वर्ष में अपना राजस्व घाटा घटाकर सकल घरेलू उत्पाद का 4.6 प्रतिशत करना चाहती है.

लेकिन विश्लेषकों ने तेल की बढ़ती क़ीमतों और धीमी पड़ती अर्थव्यवस्था के मद्देनज़र सरकार के इस लक्ष्य पर सवाल उठाए हैं.

ओईसीडी को भी यही लगता है कि दुनिया में तेल की बढ़ती क़ीमतों और सरकार द्वारा उसपर दी जा रही सब्सिडी के बीच सरकार अपना घाटा कम करने में सफल न हो.

ओईसीडी की रिपोर्ट में लिखा है कि ये देखते हुए कि पिछले कुछ सालों में बजट से अधिक ख़र्च हुआ है सार्वजनिक ख़र्च पर कड़ा नियंत्रण करना होगा.

अगर भारत सरकार अपने लक्ष्य तक पहुंचना चाहती है तो उसे ख़र्च पर नियंत्रण करना होगा.

सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में तेल की सब्सिडी का बिल 5.2 अरब डॉलर रखा है बशर्ते कि उसके दाम 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहें. जबकि इस समय तेल के दाम 120 डॉलर प्रति बैरल के क़रीब हैं.

ओईसीडी ने कहा कि सतत विकास इस बात पर निर्भर करेगा कि निवेश बढ़े और घरेलू बचत की जाए.

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