महंगाई से परेशान आरबीआई ने बढ़ाई दरें

आरबीआई
Image caption मार्च 2010 से ये लगातार दसवीं बार है कि आरबीआई ने दरों में बढ़ोत्तरी की है.

भारत के केंद्रीय बैंक रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (आरबीआई) ने मौद्रिक नीति की ताज़ा समीक्षा में रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में दशमलव 25 अंकों की बढ़ोत्तरी की है.

महंगाई की बढ़ती दर को देखते हुए संभावना व्यक्त की जा रही थी आरबीआई इन दरों में वृद्धि करेगा.

अर्थशास्त्र की भाषा में रेपो रेट वो दर है जिस पर आरबीआई बैंकों को कम अवधि के लिए उधार देता है. बैंक जब आरबीआई में अपना पैसा जमा करते हैं और आरबीआई उन्हें जिस दर से ब्याज देता है वह रिवर्स रेपो रेट कहलाता है.

इस बदलाव के बाद रेपो रेट बढ़कर 7.5 प्रतिशत और रिवर्स रेपो रेट 6.5 प्रतिशत हो गई है.

पूर्व आरबीआई गवर्नर और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति के प्रमुख सी रंगराजन ने इसे सही कदम बताया है, हालाँकि आरबीआई के इस कदम के बाद शेयर बाज़ार में गिरावट दर्ज की गई है.

मार्च 2010 से अब तक लगातार ये लगातार दसवीं बार है कि आरबीआई ने दरों में बढ़ोत्तरी की है.

दबाव बना है

बैंक ने एक वक्तव्य में कहा है कि देश में महंगाई दर मुश्किल स्तर पर पहुँच गई है, साथ ही ईंधन की क़ीमत पर भी दबाव है.

बैंक ने कहा, "हालाँकि सामान के दाम कुछ संभले हैं और विकास की दर पर भी असर पड़ा है, महंगाई दर के बढ़ने का खतरा कायम है. इसी को देखते हुए मुद्रा नीति की कोशिश मुद्रा स्फीति की बढ़ती दर को काबू में करना है".

बैंक ने माना है कि मुद्रा स्फीति को रोकने के लिए दरों को बढ़ाने के उसके कदम से कुछ समय तक विकास की रफ़्तार पर फर्क पड़ना, लेकिन ये कदम उठाना अनिवार्य है.

याद रहे कि अर्थव्यवस्था की रफ़्तार लगातार घट रही है और एक वक़्त नौ प्रतिशत की रफ़्तार से बढ़ रही इसकी रफ़्तार 7.8 प्रतिशत रह गई है.

आरबीआई के इस क़दम से घर, कार और दूसरे सामान के लिए गए ऋणों के दरों में वृद्धि हो सकती है.

बैंक ने कहा कि उसके इस क़दम से महंगाई दर को रोकने में मदद मिलेगी क्योंकि बाज़ार में बढ़ती मांग के दबाव पर क़ाबू पाया जा सकेगा. साथ ही बैंक ने कहा कि दुनिया भर में जारी प्रतिकूल गतिविधियों से भी भारत के विकास पर पड़ रहे असर को भी रोकने की कोशिश की गई है.

बैंक ने दोहराया कि महंगाई को रोकने के लिए वो लगातार कदम उठाता रहेगा.

प्रतिक्रिया

विभिन्न कंपनियों के चैंबर सीआईआई ने अपनी प्रतिक्रिया में इसे आपेक्षित कदम बताया है.

एक बयान में सीआईआई के डायरेक्टर जनरल चंद्रजीत बैनर्जी ने उम्मीद जताई कि ऐसे वक्त जब अर्थव्यवस्था की रफ़्तार धीमी हो रही है, आरबीआई दरों में और ज़्यादा वृद्धि नहीं करेगी.

बैनर्जी के मुताबिक मुद्रा-स्फीति में तेज़ी का कारण सामान की आपूर्ति में समस्याओं से जुड़ा है और मुद्रा नीति में बदलाव करने से इसमें कोई फ़र्क नहीं पडेगा.

उन्होंने कहा, ‘अगर अर्थव्यवस्था के धीमे होने की रफ़्तार बढ़ती है, तो उसे वापस पटरी पर लाना मुश्किल होगा और उसमें वक्त लगेगा.’

प्रामेरिका म्युचुअल फंड के प्रमुख निवेश अधिकारी महेंद्र कुमार जाजू ने भी आरबीआई के कदम को आपेक्षित बताया है.

आईसीआईआई प्रमुख चंदा कोचर ने कहा कि रिज़र्व बैंक के इस कदम से बैंकों के लिए ऋण देना महंगा होगा.

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