घटा सकता है महँगाई रिज़र्व बैंक ?

भारतीय रिज़र्व बैंक
Image caption रिज़र्व बैंक ने पिछले साल मार्च से अबतक दसवीं बार ये दर बढ़ाए हैं

भारत में केंद्रीय बैंक – भारतीय रिज़र्व बैंक – ने मुद्रास्फ़ीति को नियंत्रित करने के उद्देश्य से एक बार फिर बैंकों के रेपो और रिवर्स रेपो दरों में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की है. रिज़र्व बैंक के इस क़दम पर आर्थिक विश्लेषक भरत झुनझुनवाला का विश्लेषण –

यदि रिज़र्व बैंक ये दर ना बढ़ाता तो मुद्रास्फ़ीति वर्तमान के नौ प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत तक चली गई होती, इसलिए दर बढ़ाने के फ़ैसले से महँगाई पर असर पड़ेगा.

मगर समस्या की जड़ गहरी है. मुद्रास्फ़ीति तीन मुख्य कारणों से बढ़ रही है – तेल की कीमतों के कारण, कृषि उत्पादों की कीमतों के कारण और विदेशी निवेश में हो रही वृद्धि के कारण. रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति इन कारणों पर ध्यान नहीं देती.

मुद्रास्फ़ीति को नियंत्रित करने के लिए ये ज़रूरी है कि सरकार तेल की खपत को नियंत्रित करने के उपाय करे. वर्तमान नीति के तहत तेल पर सब्सिडी दी जा रही है और तेल की खपत बढ़ रही है, जो बिल्कुल अनुचित है.

इसके कारण सरकार को सब्सिडी ज़्यादा देनी पड़ रही है और नोट अधिक छापने पड़ रहे हैं जिससे महँगाई बढ़ती जा रही है. तेल की कीमतों के कृत्रिम नियंत्रण से महँगाई नियंत्रित करने की सोच ग़लत है.

दूसरी ओर कृषि पदार्थों के दाम बढ़ने का मूल कारण ये है कि कृषि भूमि कम होती जा रही है. या तो हाईवे या रिहाइशी इलाक़ों को बनाने के लिए, या फिर जटरोफ़ा जैसे जैव-ईंधनों की खेती के कारण सामान्य कृषि की भूमि कम हो रही है. कृषि की उत्पादकता बढ़ाने पर ध्यान दिए बिना महँगाई क़ाबू में नहीं आएगी.

एक और मुद्दा ऐसे धन का है जिसका कोई हिसाब नहीं होता. रिज़र्व बैंक ऐसे धन पर ब्याज़ दर बढ़ाता है जिसका हिसाब होता है. तो दर बढ़ाकर ऐसी मुद्रा का प्रचलन तो नियंत्रित किया जा सकता है. मगर उस मुद्रा की मात्रा तो वैसी की वैसी ही रहती है जिसका कोई हिसाब नहीं. इसलिए रिज़र्व बैंक के दर बढ़ाने के उपाय का संपूर्ण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव कम हो जाता है.

सरकार जो ग़लत नीतियाँ चला रही है जिनसे महँगाई बढ़ रही है, उसका समाधान रिज़र्व बैंक से माँगा जा रहा है जो अनुचित है. रिज़र्व बैंक दीर्घकालीन तौर पर इस मामले में कुछ कर ही नहीं सकता है और रिज़र्व बैंक की जो नीति है वो अर्थव्यवस्था का गला घोंटने के जैसी है.

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