चीन महंगाई को क़ाबू में रखेगा

  • 24 जून 2011
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Image caption जियाबाओ ने संकटग्रस्त यूरोपीय देशों के क़र्ज़ का भार उठाने का वायदा किया है

चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने कहा है कि उनका देश मुद्रास्फीति को क़ाबू में रखते हुए आर्थिक विकास के पथ पर अग्रसर रहेगा.

लंदन से प्रकाशित अख़बार 'फ़ाइनेंशियल टाइम्स' में छपे एक लेख में जियाबाओ ने कहा कि चीन सरकार इस साल महंगाई पर अंकुश लगाने में सफल रहेगी.

हाल के महीनों में चीन सरकार के लिए महंगाई एक बड़ी समस्या रही है.

मई महीने में चीन में मुद्रास्फीति की दर 5.5 प्रतिशत थी जो कि तीन वर्षों का सर्वोच्च स्तर है. लेकिन अधिकारियों को डर है कि इस महीने महंगाई और ऊपर जा सकती है.

चीन की महंगाई में मुख्य योगदान खाद्य पदार्थों की क़ीमतों में आई असामान्य तेज़ी का है.

चिंता

विशेषज्ञों को इस बात की चिंता है कि चीन में मुद्रास्फीति को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो इससे चीन ही नहीं बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. क्योंकि 2007 में शुरू हुए अंतरराष्ट्रीय वित्त संकट के बाद से पश्चिमी देशों की अर्थव्यवस्था को मुख्य सहारा चीन से ही मिल रहा है.

जियाबाओ का बयान उनकी यूरोप यात्रा से पहले आया है. अपनी पाँच दिनों की इस यात्रा में चीनी प्रधानमंत्री जर्मनी और ब्रिटेन जाएंगे.

ज़ाहिर है उनकी यात्रा के दौरान बातचीत के दौरान कई यूरोपीय देशों में चल रहे क़र्ज़ के संकट का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहेगा.

यूरोपीय संघ चीन का सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार है और दोनों पक्षों के बीच सालाना 500 अरब डॉलर का व्यापार होता है.

व्यापार के इस स्तर को बनाए रखने के लिए चीन उन यूरोपीय देशों के क़र्ज़ का भार उठाने के लिए भी तैयार है जो कि इस समय आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं.

लेकिन इसके लिए ज़रूरी है कि चीन के आर्थिक विकास की मौजूदा दर बनी रहे और वहाँ सामाजिक अस्थिरता की स्थिति नहीं बने. इन बातों की गारंटी के लिए वहाँ महंगाई पर लगाम लगाया जाना और भी ज़रूरी बन जाता है.

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