भारतीय शेयर बाज़ार पर सवाल

  • 24 जून 2011

पिछले कुछ सालों में भारत में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों की लंबी कतार लगी हुई थी. लेकिन इस साल ज़्यादा विदेशी निवेशक नज़र नहीं आ रहे हैं.

इस वजह से भारतीय शेयर बाज़ारों का बुरा हाल हो रहा है और छोटे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.

हाल यह है कि अब विदेशी निवेशक भारत से अधिक पाकिस्तान में निवेश कर रहे हैं.

हैदराबाद के एक छोटे निवेशक ज़ाहिद शेयर बाज़ार खुलते ही अपने कम्प्यूटर के सामने बैठ कर शेयरों के भाव का जायज़ा लेते हैं... इस उम्मीद में कि शायद शेयर के भाव में उछल आए.

निवेशकों को नुकसान

पिछले नौ महीनों में उन्होंने काफ़ी नुकसान उठाया है. वे कहते हैं, "नौ महीने पहले अगर किसी ने ढाई लाख का निवेश किया था उसे अब डेढ़ लाख का नुकसान हुआ है. छोटे निवेशक काफ़ी परेशान हैं. मैं अब यह धंधा छोड़ कर कुछ और काम की तलाश करना चाहता हूँ. "

पिछले साल विदेशी निवेशकों ने भारत में लगभग तीस अरब डॉलर का निवेश किया था जिसमें अधिकतर पैसा शेयर बाज़ारों में निवेश किया गया था.

इसके कारण छोटे भारतीय निवेशकों ने शेयर मार्केट में पैसे निवेश करके लाखों और करोड़ों रूपये कमाए लेकिन इस साल ज़ाहिद की तरह अधिकतर छोटे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.

उम्मीद बाकी है

एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के शेयर बाज़ार विश्व के सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले बाज़ारों में से एक है. यहाँ तक कि पाकिस्तान, जहाँ हिंसा का माहौल है, भारत से बढ़िया प्रदर्शन कर रहा है. पाकिस्तान में इस साल विदेशी निवेशक भारत से अधिक पैसे लगा रहे हैं.

शेयर दलाल अलोक चूड़ीवाला कहते हैं, “पाकिस्तान से भारत की तुलना करना उचित नहीं होगा. यह बात सही है कि विदेशी निवेशक पाकिस्तान में निवेश कर रहे हैं, उसका कारण यह है कि पाकिस्तान में भाव अब भी सस्ता है. निवेशक वहाँ जाएगा जहां भाव कम हो और मुनाफा ज़्यादा. ”

अलोक चूड़ीवाला का कहना है, “विदेशी निवेशकों के भारत में अब कम निवेश करने के कई कारण हैं. पहले यह कि महंगाई बहुत बढ़ गई है जिसके कारण इंटरेस्ट रेट बढ़ाना पड़ रहा है. इससे स्टॉक मार्केट को मार पहुँच रही है. दूसरे ये कि जो सुधार आने थे वो नहीं आए हैं जिसके कारण भारत अब आकर्षक मार्केट नहीं रहा"

तो क्या अब भारतीय शेयर बाज़ारों से विदेशी निवेशकों का रोमांस ख़त्म हुआ?

मुंबई के प्रसिद्ध उद्योगपति सुशील ज्वार्जका मानते हैं कि अच्छे दिन फिर से लौट सकते हैं. उनका कहना है, “भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मज़बूत है. फसल की पैदावार रिकॉर्ड तोड़ है. ज़रुरत है महंगाई पर काबू पाने की और कई क्षेत्रों में सुधार शुरू करने की.”

सुशिल ज्वार्ज्का की तरह मुंबई में दूसरे उद्योगपति, व्यापारी, निवेशक और शेयर दलाल उस दिन का इंतज़ार कर रहे हैं जब भारत सरकार विदेशी निवेशकों को लुभाने के लिए उचित क़दम उठाएगी. यह बात और है कि सरकार इसके लिए अब भी तैयार न हो.

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार