केयर्न-वेदांता सौदे को सशर्त मंज़ूरी

  • 1 जुलाई 2011
Image caption राजस्थान तेल परियोजना में ओएनजीसी की 30 प्रतिशत भागीदारी है

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने ब्रितानी कंपनी केयर्न एनर्जी के अपने भारतीय युनिट को वेदांता रिसोर्सिज़ को बेचने के सौदे को सर्शत मंज़ूरी दे दी है.

शर्त यह है कि केयर्न या उसके उत्तराधिकारी को राजस्थान के तेल के कुओं से निकलने वाले तेल-गैस पर रॉयल्टी और तेल उपकर (सेस) का भुगतान करना होगा.

केयर्न एनर्जी और वेदांता के बीच दस महीने पहले इस सिलसिले में 9.6 अरब डॉलर के सौदे पर सहमति बनी थी.

केयर्न की राजस्थान तेल परियोजना में 30 प्रतिशत भागीदारी भारत के तेल एवम् प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) की है.

मंत्रियों के समूह की सिफ़ारिश

कैबिनेट समिति की बैठक के बाद ये घोषणा करते हुए केंद्रीय तेल मंत्री जयपाल रेड्डी ने पत्रकारों को बताया कि इस फ़ैसले का अनुमोदन ओएनजीसी को करना होगा और पूरे मामले में सुरक्षा संबंधी मंज़ूरी भी लेनी ज़रूरी होगी.

उनका कहना था, "आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के नेतृत्व वाले मंत्रियों के समूह की सिफ़ारिश का अनुमोदन कर दिया है. इस समूह को इस पूरे मामले पर राय व्यक्त करने के लिए कहा गया था."

केयर्न इंडिया को इस मामले की आर्बिट्रेशन यानी पंचाट में दी गई याचिका भी वापस लेनी होगी. केयर्न इंडिया ने इन तेल के कुओं में अपने 70 प्रतिशत हिस्से में 2500 रुपए प्रति टन के तेल उपकर पर आपत्ति जताते हुए आर्बिट्रेशन प्रकिया शुरु की थी.

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