ख़र्चों पर लगाम कसने के निर्देश

रुपए
Image caption दिशा-निर्देशों के मुताबिक बजट में तय लक्ष्यों को पाने के लिए खर्चों में सख्ती से कटौती ज़रूरी है.

विश्व स्तर पर आर्थिक मंदी की मार और कई देशों में जारी आर्थिक कटौतियों के बीच भारत के वित्त मंत्रालय ने भी ख़र्च में कटौतियों को लेकर सख़्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं.

वित्त मंत्रालय का कहना है कि बेहतर ढंग से सरकार चलाने और योजनाएं लागू करने के लिए संसाधनों की कमी न पड़े, इसके लिए बेवजह विदेश यात्राओं, गैर ज़रूरी पदों पर नियुक्तियों, नए सरकारी वाहनों की ख़रीद-फ़रोख्त और गोष्ठियों-सम्मेलनों पर कम से कम ख़र्च या रोक लगाए जाने की ज़रूरत है.

भारत सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों के लिए जारी किए गए इन दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि वर्ष 2011-12 के बजट में तय किए गए लक्ष्यों को पाने के लिए सख़्ती के साथ ख़र्चों में कटौती ज़रूरी है.

वित्त मंत्रालय का कहना है कि सरकारी मंत्रालय और विभाग गोष्ठियां, सम्मेलन और परिचर्चाएं आयोजित करते समय कटौतियों को ध्यान में रखें और बेहद ज़रूरी होने पर ही ऐसे आयोजन करें.

'अनुमति नहीं'

एक ओर इस तरह के आयोजनों के ख़र्च में 10 फीसदी कटौती लागू करने की बात कही गई है, वहीं पांच सितारा होटलों में इस तरह के आयोजनों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है.

दिशा-निर्देशों के अनुसार रक्षा संबंधी ज़रूरतों के अलावा किसी भी दूसरी ज़रूरत के लिए नए सरकारी वाहनों की ख़रीद की इजाज़त नहीं दी जाएगी.

सरकारी विभागों और मंत्रालयों से कहा गया है कि वो अपने-अपने स्तर पर विदेश यात्राओं का बजट तय करें और किसी भी रूप में उससे आगे न बढ़ें. साथ ही विदेश यात्रा पर जाने वाले प्रतिनिधिमंडल में लोगों की संख्या पर भी कड़ी नज़र रखी जाए.

वित्त सचिव की ओर से जारी इन दिशा-निर्देशों में ग़ैर ज़रूरी पदों के अलावा मंत्रालयों और विभागों में नियुक्त सलाहकारों की संख्या कम से कम करने और उपयुक्त दरों पर सलाहकारों की फ़ीस तय करने को कहा गया है.

दिशा-निर्देशों के मुताबिक़ राज्य सरकारों को अब हर महीने अपने ख़र्च का ब्यौरा जारी करना होगा और यह भी बताना होगा कि केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत उनके पास कितना धन बचा है.

मंत्रालय के दिशा-निर्देश कहते हैं कि महीने के आख़िर में सिर्फ़ उन उत्पादों और सेवाओं के लिए भुगतान किया जाए, जो विभागों को मिल चुकी हैं और विशिष्ट ज़रूरतों वाले कामों के अलावा किसी भी सूरत में पहले पैसे का भुगतान न किया जाए.

वित्त सचिव के अनुसार इन दिशा-निर्देशों को लागू करने की ज़िम्मेदारी संबंधित विभागों और मंत्रालयों की है.

साथ ही इन्हें लागू करने के लिए बनाए गए नियमों और उठाए गए कदमों से संबंधित रिपोर्ट हर तिमाही में वित्त मंत्रालय को सौंपी जाए.

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