एशिया के बाज़ार में गिरावट

Image caption वित्त मंत्रियों ने कहा है कि वो हर हाल में यूरो मुद्रा की रक्षा करेंगे.

यूरोज़ोन का कर्ज़ संकट इटली और स्पेन में भी पसरने की आशंका के बीच एशिया के शेयर बाज़ार में गिरावट दर्ज की गई है.

जापान का मुख्य शेयर सूचकांक निक्की 1.5% नीचे गिर गया है जबकि हांग कांग का सूचकांक 2% नीचे गिरा है.

ये गिरावट सोमवार को यूरोपीय स्टॉक मार्केट में आई गिरावट के बाद दर्ज की गई है.

इसका सबसे बड़ा असर इटली में देखा गया जहां बाज़ार 4% नीचे लुढ़का.

सोमवार को यूरोज़ोन के वित्त मंत्रियों ने कहा कि वे इस संकट से निपटने के लिए नए क़दम उठाने के लिए तैयार हैं.

चिंता इस बात की है कि इटली और स्पेन भी ग्रीस,पुर्तगाल और रिपब्लिक ऑफ़ आयरलैंड का रास्ता अपना कर यूरोपीय संघ और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मदद की मांग करेंगे.

बैठक

उधर वित्तीय संकट के गहराने की आशंकाओं के बीच ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ के वित्त मंत्रियों की अहम बैठक हो रही है.

यूरोज़ोन में इस बात पर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं कि ग्रीस का कर्ज़ संकट यूरोप की अन्य अर्थव्यवस्थाओं को भी चपेट में ले सकता है.

ग्रीस को उबारने के लिए एक नई योजना पर बैठक कर रहे यूरोज़ोन के वित्त मंत्रियों के एजेंडे पर भी इटली और स्पेन की अर्थव्यवस्थाओं पर ग्रीस संकट के फैलने का डर ही हावी रहा.

आठ घंटे तक चली बैठक में इस बात पर कोई फ़ैसला नहीं हो सका कि ग्रीस को उबारने के लिए निजी क्षेत्र के बॉंड धारकों को किस तरह से शामिल किया जाए.

इस अनिश्चितता का सीधा असर दिखा इटली और स्पेन के शेयर बाज़ारों पर जो यूरोज़ोन की तीसरी और चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं.

ब्रसेल्स से बीबीसी संवाददाता क्रिस मॉरिस का कहना है कि यदि ये दोनों देश कर्ज़ संकट में घिरते हैं तो उनके सामने ग्रीस, आयरलैंड और पुर्तगाल को कर्ज़ संकट से उबारने की समस्या बौनी नज़र आएगी.

वादा

Image caption सोमवार को यूरोपीय शेयर बाज़ार में भारी गिरावट दिखी.

यूरोज़ोन के मंत्रियों ने अपना वादा दोहराया है कि वो हर हाल में यूरो मुद्रा का बचाव करेंगे.

उन्होंने कहा है कि जिन देशों को राहत पैकेज स्वीकार करने की ज़रूरत पड़ी उनके लिए सस्ते दरों पर कर्ज़ उपलब्ध कराने की कोशिश की जाएगी.

लेकिन ग्रीस को कर्ज़ संकट से उबारने के लिए एक और राहत पैकेज में निजी बैंकों की भागीदारी पर वो कोई समयसीमा नहीं तय कर पाए हैं.

और इस से बाज़ार में खलबली मची हुई है.

वहां ये सोच हावी हो रही है कि राजनेता फ़ैसले लेने में, भले ही वो थोड़े मुश्किल और जटिल हों, बेहद देर कर रहे हैं और ये फ़ैसले जल्द से जल्द हों.

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