इन्फ़ोसिस के मुनाफ़े में आई गिरावट

इन्फ़ोसिस
Image caption रिपोर्ट की घोषणा के तुरंत बाद बाज़ार में कंपनी के शेयर में भी गिरावट आई

भारत की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ़्टवेयर कंपनी इन्फ़ोसिस लिमिटिड की पहली तिमाही के नतीजों में पिछली तिमाही के मुक़ाबले मुनाफ़े में 5.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है.

इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में इन्फ़ोसिस का लाभ पिछली तिमाही के 1,818 करोड़ रुपए से घटकर 1,720 करोड़ रुपए रह गया है.

लेकिन पिछले साल जून तिमाही में हुए मुनाफ़े के मुक़ाबले इस तिमाही में 16 प्रतिशत की बढ़त देखी गई.

कहा जा रहा है कि कर्मचारियों की तनख़्वाह बढ़ाए जाने के कारण कंपनी पर काफ़ी भार पड़ा है.

फ़ाइनेन्शल एक्सप्रेस के प्रबंध निदेशक और विश्लेषक एम के वेणु ने कहा कि यूरोपीय देशों में मंदी होने की वजह से इंफ़ोसिस के बिज़नेस प्रॉजेक्ट पर बुरा असर पड़ रहा है, जिसका असर कंपनी के मुनाफ़े पर पड़ा है.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "ज़्यादातर यूरोपीय देश अभी तक मंदी की मार से उबर नहीं पाए हैं, जिसका असर इंफ़ोसिस के यूरोपीय प्रॉजेक्टों पर पड़ा है. इसके अलावा कंपनी में हो रहे प्रबंधकीय बदलाव का भी अप्रत्यक्ष प्रतिकूल असर उसके मुनाफ़े पर पड़ा है."

उम्मीद

हालांकि अगर सालाना मुनाफ़े की बात की जाए तो उसमें 15.7 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है.

कंपनी का राजस्व पिछले साल की पहली तिमाही के 6,198 करोड़ से बढ़कर 7,485 करोड़ दर्ज किया गया है.

यानी राजस्व में क़रीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली है.

इस तिमाही की रिपोर्ट की घोषणा के तुरंत बाद बाज़ार में कंपनी के शेयर में भी क़रीब पाँच प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली.

जब एम के वेणु से पूछा गया कि क्या इन्फ़ोसिस के बुरे प्रदर्शन की वजह से निवेशकों का विश्वास कंपनी पर से उठ जाएगा, तो उन्होंने कहा, "जो बात दो साल पहले इन्फ़ोसिस में थी, वो अब नहीं रही. कुछ सालों पहले निवेशकों को उम्मीद से ज़्यादा रिटर्न मिलता था, लेकिन अब अनिश्चितता का माहौल बन गया है जिससे उसकी साख़ पर प्रश्नचिन्ह तो लगा है."

निवेशकों को कंपनी से बेहतर आंकड़ों की उम्मीद थी.

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