कैसे देखा एयर इंडिया ने ड्रीमलाइनर का सपना?

Image caption एयर इंडिया अपने बेड़े में 27 बोइंग 787 (ड्रीमलाइनर) विमान शामिल करेगा.

बोइंग का आधुनिक विमान – बोइंग 787 ड्रीमलाइनर आज पहली बार दिल्ली के इंदिरा गांधी हवाई अड्डे पहुंचा.

एयर इंडिया ने क़रीब 17,000 करोड़ रुपए की लागत पर तीन साल पहले 27 ड्रीमलाइनर विमान आर्डर किए थे.

एक अनुमान के मुताबिक इस व़क्त एयर इंडिया का कुल घाटा 16,000 करोड़ रुपए हैं.

एयर इंडिया प्रबंधन ख़ुद प्रधानमंत्री कार्यालय को बता चुका है कि उसे अपने कर्ज़ो पर ब्याज़ चुकाने में दिक्कत आ रही है. पिछले दो सालों से वो अपने कर्मचारियों को वेतन नहीं दे पाया है और अब तेल कंपनियों को ईंधन के लिए भुगतान करना भी मुश्किल हो रहा है.

ऐसे में एयर इंडिया के बेड़े में नए विमान लाने से उसकी वित्तीय परेशानियों हल होने के बजाय बढ़ेंगी.

‘बढ़ेंगी वित्तीय परेशानियां’

दुनियाभर में अबतक क़रीब 56 कंपनियां 827 बोइंग 787 विमान का आर्डर दे चुकी हैं.

बोइंग का ड्रीमलाइनर विमान एक हल्का और कम ईंधन ख़पत करने वाला विमान बताया जाता है.

इस विमान को मध्यम दूरी के रास्तों के लिए बेहतर माना जा रहा है. एयर इंडिया के प्रवक्ता कमलजीत रत्तन ने बताया, "ड्रीमलाइनर एयर इंडिया के लिए एक बहुत अहम् निवेश है और इसे कंपनी की रोज़ी-रोटी माना जा रहा है."

लेकिन विमानन मामलों के जानकार और डेढ़ साल पहले एयर इंडिया के जन-संपर्क अधिकारी रहे जितेन्द्र भार्गव के मुताबिक नए विमान खर्चों को कम करने का रास्ता नहीं हो सकते.

भार्गव कहते हैं कि, “एयर इंडिया की मैनेजमेंट, मार्केटिंग, वित्तीय व्यवस्था और उसके कर्मचारियों के दृष्टिकोण और काम करने के तरीके में जब तक मूलभूत सुधार नहीं होंगे, तबतक एयर इंडिया संकट से नहीं उबर पाएगा.”

भार्गव के मुताबिक वर्ष 2007 में बोइंग 777 को एयर इंडिया के बेड़े में शामिल किया गया था लेकिन इससे घाटा कम नहीं हुआ, ज़रूरत नए विमानों की नहीं बल्कि विमानों को पूरी क्षमता से इस्तेमाल करने की है.

एयर इंडिया के विमान अपनी क्षमता से कम पर चलते हैं. औसतन 65 से 70 प्रतिशत यात्री ही उनमें सफर करते हैं.

जितेन्द्र भार्गव बताते हैं कि एक तरफ जहां विमानन उद्योग सालाना 20 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है वहीं पिछले तीन सालों में एयर इंडिया के राजस्व में 2,000 करोड़ रुपए की कमी आई है.

कब आएगा ड्रीमलाइनर

जापान की निजी एयरलाइन ऑल निप्पन ड्रीमलाइनर का आर्डर देने वाली पहली कंपनी थी और एयर इंडिया दूसरी.

हालांकि बोइंग ने अभी जापान का आर्डर ही पूरा नहीं किया है. बोइंग ड्रीमलाइनर मुहैया कराने की तय समयसीमा लगातार बढ़ाता रहा है और पहली घोषित तिथि से अब तीन साल पीछे है.

भारत को अक्तूबर तक पहला और साल के अंत तक चार ड्रीमलाइनर विमान मिलने की उम्मीद है.

18 जुलाई को एयर इंडिया के वित्तीय ढांचे में फेरबदल पर फैसले लेने के लिए मंत्री-समूह की बैठक है. इस बैठक में ड्रीमलाइनर के इस्तेमाल और एयर इंडिया की आगे की रणनीति के बारे में भी चर्चा होगी.

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